"तराईले-इस चमन की आबरू लुट जाएगी"
गर यूँ ही लुटती रहेंगी तितलियां
इस चमन की आबरु लूट जाएगी
और मिट जाएंगी सारी मस्तियाँ
गर यूँ ही लुटती रहेंगी तितलियाँ
सूनी हो जाएँगी सारी क्यारियाँ
इस गगन की आबरू लूट जाएगी
गर यूँ ही लुटती रहेंगी तितलियां
इस चमन की आबरु लूट जाएगी
— Afzal Ali Afzal















