किसी का कुछ नहीं लिया मैं ने
अपना सब कुछ गँवा दिया मैं ने
उस ने थोड़ी सी रौशनी माँगी
तो घर अपना जला दिया मैं ने
सच कहूँ तो कभी कभी मैं भी
सोचता हूँ ये क्या किया मैं ने
इक ने पूछा कि रोते कैसे हो?
मुस्कुरा कर दिखा दिया मैं ने
जिन दीवारों ने रौशनी छीनी
उन पे सूरज बना दिया मैं ने
— Ashwani Mittal 'Aish'















