मुहब्बत गर मुक़म्मल होती तो क्या ग़म थे दुनिया में
सभी चाहें हमें इतने गुरूरी हम थे दुनिया में
बना है या बना था या बनेगा ही नहीं वो शख़्स
हज़ारों लाखों में तन्हा अकेले हम थे दुनिया में
किसी छलनी हुए दिल की नहीं कोई दवा भी याँ
बदन पर आए ज़ख़्मों के कई मरहम थे दुनिया में
पड़ा है ज़ख़्मी, बेबस और तन्हा ये है हाल-ए-दिल
दुआ कोई करें ही क्यूँ कि अपने कम थे दुनिया में
हमारे ज़ख़्मी दिल को यूँ ही अपनी रेहन में रक्खा
तो कुछ ऐसे भी आदम हो रखें दरहम थे दुनिया में
बड़ी मक़बूल थी तन्हाइयाँ रुसवाइयाँ हम को
फ़क़त ये ही हमारे पास कुछ हमदम थे दुनिया में
— Deep kamal panecha















