शहर भर में हमारे बस अब आप केहुस्न-ए-सीरत की ही सुर्खियाँ उड़ती हैंआप के गुल-बदन से गुलों को है रश्कआप की मेहँदी पर तितलियाँ उड़ती हैं— Muntazir shrey