ख़ुदा से हम सभी बंदों का गर रिश्ता नहीं रहता

ज़मीं पर प्यार करने वालों का क़िस्सा नहीं रहता

सवारी के उतरते ही सवारी मिलती जाती है
मुहब्बत के सफ़र में मैं कभी तन्हा नहीं रहता

तुझे अफ़सोस गर मेरे बदल जाने पे है तो सुन
समुंदर में मिला दरिया तो फिर दरिया नहीं रहता

अभी तुम को मैं अपने पास बैठा लेता हूँ लेकिन
मैं तो भौरा हूँ जो इक फूल पे बैठा नहीं रहता

वो मुझ से ग़ुस्से में कर बैठती है कोई नादानी
मैं उस से चाह कर भी देर तक ग़ुस्सा नहीं रहता

अभी तक प्रेम ज़िंदा है जहाँ में दोनों का वरना
कोई राधा नहीं रहती कोई कान्हा नहीं रहता

— Rajnish Vishwakarma

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