किसी के वास्ते मुश्किल किसी का आसरा दरिया

मेरी मंज़िल किनारा है मेरा है रास्ता दरिया

मेरा कोई नहीं है जो मुझे ग़म में दिलासा दे
यहीं दरिया निकलता है यहीं फिर सूखता दरिया

तिलिस्मी तुम इशारे कर बुलाओ ना मुझे ऐसे
मेरा दिल मोम-सा है और मोहब्बत आग का दरिया

तुम्हारा ही सिला जानम नदी में जो रवानी है
कभी उस ओर जाना तुम तुम्हें देगा दुआ दरिया

तेरे बस एक कहने पर सभी को छोड़ आए हम
मगर अब याद आता है मेरा लश्कर मेरा दरिया

तुम्हारे बिन हमारा घर बसाना ऐसा है जैसे
सलाम ए आख़िरी कर के समुंदर में मिला दरिया

— Mohammad Aquib Khan

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Yaad Shayari

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