मिलते बिछड़ते रहते हैं हर मोड़ पर हमेंहम जैसे कोई रेल सवारी ये रास्तेबाइक पे अपनी बैठ निकलते हैं घर से जबरफ़्तार देखते हैं हमारी ये रास्ते— Ajeetendra Aazi Tamaam