"तुझ बिन कुछ अरमान नहीं है"
ज़िंदा हूँ पर जान नहीं है
तुझ बिन कुछ अरमान नहीं है
लम्हा लम्हा तन्हाई है
बे-ताबी है रुसवाई है
और जो ग़म की ये खाई है
तेरी मोहब्बत में पाई है
साँसों का एहसान नहीं है
तुझ बिन कुछ अरमान नहीं है
हँसती है कब याद तुम्हारी
डसती है अब याद तुम्हारी
जलती है सब याद तुम्हारी
मुझ
में हर शब याद तुम्हारी
मुश्किल है आसान नहीं है
तुझ बिन कुछ अरमान नहीं है
बरखा सावन हार गई मैं
जो था पावन हार गई मैं
सब तन मन धन हार गई मैं
या'नी जीवन हार गई मैं
चैन का भी उनवान नहीं है
तुझ बिन कुछ अरमान नहीं है
जाम में जब हम भर जाएँगे
नाम तेरे वो कर जाएँगे
थक के फिर हम घर जाएँगे
इश्क़ में इक दिन मर जाएँगे
तेरे सिवा ईमान नहीं है
तुझ बिन कुछ अरमान नहीं है















