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अभी अधूरे हैं गीत मेरे अभी अधूरी सी दास्ताँ है  - Dutta Saghar

अभी अधूरे हैं गीत मेरे अभी अधूरी सी दास्ताँ है
न चाँद निकला न तारे दमके न मुस्कुराती वो कहकशाँ है

अभी तो होंटों पे आह सी है बुझी बुझी कुछ निगाह सी है
अभी तो हर-सू ख़मोशियाँ हैं अभी तो हर-सू धुआँ धुआँ है

अभी तो राहों में पेच-ओ-ख़म हैं कि हादसे भी क़दम क़दम हैं
अभी तो बाक़ी कई सितम हैं अभी तो बाक़ी कुछ इम्तिहाँ है

अभी तो क़ौस-ए-क़ुज़ह के जैसे हैं ख़्वाब बुनने हसीन कितने
वो फूल भी तो अभी हैं चुनने अज़ल से जिन की महक रवाँ है

Dutta Saghar
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