चारासाज़ों के बस की बात नहीं - Fehmi Badayuni

चारासाज़ों के बस की बात नहीं
मैं दवाओं के बस की बात नहीं

चाहता हूं मैं दीमकों से नजात
जो किताबों के बस की बात नहीं

तेरी ख़ुशबू को क़ैद में रखना
इत्रदानों के बस की बात नहीं

ख़त्म कर दे अज़ाब कब्रों का
ताजमहलों के बस की बात नहीं

आंसुओं में जो झिलमिलाहट है
वो सितारों के बस की बात नहीं

ऐसा लगता है अब तेरा दीदार
सिर्फ़ आंखों के बस की बात नहीं

Fehmi Badayuni
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Khushboo Shayari

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