वस्ल की आख़िरी वो घड़ी याद हैवो जहाँ रू-ब-रू थी गली याद हैजो ख़फ़ा हो के जाती रक़ीबों तलकमुझ को वो सरफिरी मनचली याद है— Harshwardhan Aurangabadi