सीने से आधी रात के

फूटी वो सूरज की किरन
बरसे वो तारों के कँवल
वो रक़्स में आया गगन
आए मुबारकबाद को
कितने शहीदाने- वतन
आज़ाद है, आज़ाद है, आज़ाद है अपना वतन
आज़ाद है अपना वतन

अय रोदे-गंगा गीत गा
इठला के चल मौजे-चमन
हाँ, अय हिमाला झूम जा
रक़्सां हो अय दश्तो-दिमन
हाँ, अय इलौरा के बुतो
नग़्मासरा हो, नग़्माजन
आज़ाद है, आज़ाद है, आज़ाद है अपना वतन
आज़ाद है अपना वतनअय परचमे-सहरंग तू
अपने वतन की आबरू
तू है हमारा नंगो-नाम
हम तुझ को करते हैं सलाम
ज़र्दी से तेरी रूनुमा
बेलौस ख़िदमत की लगन

सब्ज़ी से तेरी जल्वागर
हिम्मत, जवानी, बांकपन
तेरी सफ़ेदी से अयां
इंसानियत, पाकीज़ापन

अय परचमे-सहरंग तू
अपने वतन की आबरू
तू है हमारा नंगो-नाम
हम तुझ को करते हैं सलाम
हम तुझ को करते हैं सलाम

— Jaan Nisar Akhtar

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