हुस्न बला का क़ातिल हो पर आख़िर को बेचारा है इश्क़ तो वो क़ातिल जिस ने अपनों को भी मारा हैये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भीइस के छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी— Jaun Elia