shaanon pe kiske ashk bahaaya karengi aap | शानों पे किसके अश्क बहाया करेंगी आप

  - Jaun Elia

शानों पे किसके अश्क बहाया करेंगी आप
रूठेगा कौन? किसको मनाया करेंगी आप

गुस्से में नौकरों से उलझेंगी बार बार
मामूली बात को भी बढ़ाया करेंगी आप

  - Jaun Elia

Aansoo Shayari

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    हम कुछ ऐसे उसके आगे अपनी वफ़ा रख देते हैं
    बच्चे जैसे रेल की पटरी पर सिक्का रख देते हैं

    तस्वीर-ए-ग़म, दिल के आँसू, रंजो-नदामत, तन्हाई
    उसको ख़त लिखते हैं ख़त में हम क्या क्या रख देते हैं
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    Subhan Asad
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    आँसू पोंछ के हँस देता है
    आग में आग लगाने वाला
    Arzoo Lakhnavi
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    मोहब्बत में इक ऐसा वक़्त भी दिल पर गुज़रता है
    कि आँसू ख़ुश्क हो जाते हैं तुग़्यानी नहीं जाती
    Jigar Moradabadi
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    जिस तरह हँस रहा हूँ मैं पी पी के गर्म अश्क
    यूँ दूसरा हँसे तो कलेजा निकल पड़े
    Kaifi Azmi
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    आप की याद आती रही रात भर
    चश्म-ए-नम मुस्कुराती रही रात भर
    Makhdoom Mohiuddin
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    माँ के आँसू को समझता हूँ मुक़द्दस इतना
    बस उन्हें चूम ले अफ़ज़ल तो वज़ू हो जाए
    S M Afzal Imam
    चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है
    हम को अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है
    Hasrat Mohani
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    किसी ने ख़्वाब में आकर मुझे ये हुक्म दिया
    तुम अपने अश्क भी भेजा करो दुआओं के साथ
    Afzal Khan
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    भोले बन कर हाल न पूछ बहते हैं अश्क तो बहने दो
    जिस से बढ़े बेचैनी दिल की ऐसी तसल्ली रहने दो
    Arzoo Lakhnavi
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    सारे आँसू तुझ पर ज़ाया क्यूँ कर दें
    हमनें तेरे बाद भी दिलबर करने हैं
    Shikha Pachouly
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    मुझ से अब लोग कम ही मिलते हैं
    यूँ भी मैं हट गया हूँ मंज़र से
    Jaun Elia
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    ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी
    इसके छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी
    Jaun Elia
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    ईज़ा-दही की दाद जो पाता रहा हूँ मैं
    हर नाज़-आफ़रीं को सताता रहा हूँ मैं

    ऐ ख़ुश-ख़िराम पाँव के छाले तो गिन ज़रा
    तुझ को कहाँ कहाँ न फिराता रहा हूँ मैं

    इक हुस्न-ए-बे-मिसाल की तमसील के लिए
    परछाइयों पे रंग गिराता रहा हूँ मैं

    क्या मिल गया ज़मीर-ए-हुनर बेच कर मुझे
    इतना कि सिर्फ़ काम चलाता रहा हूँ मैं

    रूहों के पर्दा-पोश गुनाहों से बे-ख़बर
    जिस्मों की नेकियाँ ही गिनाता रहा हूँ मैं

    तुझ को ख़बर नहीं कि तिरा कर्ब देख कर
    अक्सर तिरा मज़ाक़ उड़ाता रहा हूँ मैं

    शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई
    लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं

    इक सत्र भी कभी न लिखी मैं ने तेरे नाम
    पागल तुझी को याद भी आता रहा हूँ मैं

    जिस दिन से ए'तिमाद में आया तिरा शबाब
    उस दिन से तुझ पे ज़ुल्म ही ढाता रहा हूँ मैं

    अपना मिसालिया मुझे अब तक न मिल सका
    ज़र्रों को आफ़्ताब बनाता रहा हूँ मैं

    बेदार कर के तेरे बदन की ख़ुद-आगही
    तेरे बदन की उम्र घटाता रहा हूँ मैं

    कल दोपहर अजीब सी इक बे-दिली रही
    बस तीलियाँ जला के बुझाता रहा हूँ मैं
    Read Full
    Jaun Elia
    मुस्तक़िल बोलता ही रहता हूँ
    कितना ख़ामोश हूँ मैं अंदर से
    Jaun Elia
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    अब मेरी कोई ज़िंदगी ही नहीं
    अब भी तुम मेरी ज़िंदगी हो क्या
    Jaun Elia
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