0

तुम अपने आप पर एहसान क्यूँ नहीं करते  - Madan Mohan Danish

तुम अपने आप पर एहसान क्यूँ नहीं करते
किया है इश्क़ तो एलान क्यूँ नहीं करते

सजाए फिरते हो महफ़िल न जाने किस किस की
कभी परिंदों को मेहमान क्यूँ नहीं करते

वो देखते ही नहीं जो है मंज़रों से अलग
कभी निगाह को हैरान क्यूँ नहीं करते

पुरानी सम्तों में चलने की सब को आदत है
नई दिशाओं का वो ध्यान क्यूँ नहीं करते

बस इक चराग़ के बुझने से बुझ गए 'दानिश'
तुम आंधियों को परेशान क्यूँ नहीं करते

- Madan Mohan Danish

Breakup Motivation Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Madan Mohan Danish

As you were reading Shayari by Madan Mohan Danish

Similar Writers

our suggestion based on Madan Mohan Danish

Similar Moods

As you were reading Breakup Motivation Shayari