Top 20 Dar Shayari Collection

Dar shayari captures the silent fears, hidden anxieties, and inner khauf that often remain unspoken. These verses reflect emotional vulnerability, uncertainty, and the human struggle with fear. Whether it's fear of loss, loneliness, or the unknown, dar shayari gives voice to those fragile feelings.

ऐ आसमान तेरे ख़ुदा का नहीं है ख़ौफ़ डरते हैं ऐ ज़मीन तेरे आदमी से हम — Unknown
कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है — Kumar Vishwas
अपनी इस आदत पे ही इक रोज़ मारे जाएँगे कोई दर खोले न खोले हम पुकारे जाएँगे — Waseem Barelvi
इस ख़ौफ़ में कि ख़ुद न भटक जाएँ राह में भटके हुओं को राह दिखाता नहीं कोई — Anwar Taban
अक्स-दर-अक्स बिखरना है मुझे जाने क्या टूट गया है मुझ में — Khalid Moin
ज़ात दर ज़ात हम सफ़र रह कर अजनबी अजनबी को भूल गया — Jaun Elia
प्यार की जोत से घर घर है चराग़ाँ वर्ना एक भी शम्अ' न रौशन हो हवा के डर से — Shakeb Jalali
मेरी बेचैनी का आलम मेरी बेचैनी से पूछो मेरे चहरे से पूछोगे कहेगा ठीक है सब कुछ — Aqib khan
तेरे दर से जब उठ के जाना पड़ेगा ख़ुद अपना जनाज़ा उठाना पड़ेगा — Khumar Barabankvi
ग़म-ए-हयात ने आवारा कर दिया वर्ना थी आरज़ू कि तिरे दर पे सुब्ह ओ शाम करें — Majrooh Sultanpuri
हम किसी दर पे न ठिटके न कहीं दस्तक दी सैकड़ों दर थे मिरी जाँ तिरे दर से पहले — Ibn E Insha
शे'र दर-अस्ल हैं वही 'हसरत' सुनते ही दिल में जो उतर जाएँ — Hasrat Mohani
ख़ौफ़ आता है अपने साए से हिज्र के किस मक़ाम पर हूँ मैं — Siraj Faisal Khan
उसे ज़ियादा ज़रूरत थी घर बसाने की वो आ के मेरे दर-ओ-बाम ले गया मुझ से — Farhat Abbas Shah
प्यार कुछ भी नहीं है इक डर है तुम को पाए बग़ैर खोने का — Umesh Maurya
मुझे ये डर है तेरी आरज़ू न मिट जाए बहुत दिनों से तबीअत मिरी उदास नहीं — Nasir Kazmi