Top 20 Dhokha Shayari

Dhokha shayari reflects the pain of broken trust, betrayal, and emotional wounds left behind. Whether it’s love, friendship, or life, these lines capture the silent heartbreak and the feeling of being deceived. Perfect for expressing inner dard, sharing your story, or finding comfort in words.

मैं पहले झूठ पर हकलाया उस सेे फिर उस के बा'द माहिर हो गया था — Shadab Javed
मैं सच कहूँगी मगर फिर भी हार जाऊँगी वो झूट बोलेगा और ला-जवाब कर देगा — Parveen Shakir
झूट वाले कहीं से कहीं बढ़ गए और मैं था कि सच बोलता रह गया — Waseem Barelvi
दिल-ओ-नज़र को अभी तक वो दे रहे हैं फ़रेब तसव्वुरात-ए-कुहन के क़दीम बुत-ख़ाने — Ali Sardar Jafri
उस की बातों पर मुस्काता हूँ पहले भी ऐसे झूठ सुने हैं — Pawan
मैं अपने एक दोस्त को ये कहते थक गया ऐ दोस्त हिज्र ठीक है धोखा सही नहीं — Prashant Sitapuri
ख़ैर सच तो है सच मगर ऐ झूठ मैं ने तेरा भी ए'तिबार किया — Firaq Gorakhpuri
कभी तुझ सेे मिलेंगे तो कहेंगे झूठ तुझ सेे हम न तेरी फ़िक्र करते हैं न तुझ को याद करते हैं — Sapna Moolchandani
ओहदे से निकलें किस तरह आशिक़ एक अदा उस की है हज़ार-फ़रेब — Meer Taqi Meer
मैं इस लिए भी तेरे फ़न की क़द्र करता हूँ तू झूठ बोल के आँसू निकाल लेता है — Ahmad Kamal Parvazi
वो नशा है के ज़बाँ अक़्ल से करती है फ़रेब तू मिरी बात के मफ़्हूम पे जाता है कहाँ — Pallav Mishra
अगर सच इतना ज़ालिम है तो हम से झूट ही बोलो हमें आता है पतझड़ के दिनों गुल-बार हो जाना — Ada Jafarey
ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दोहरा हुआ होगा मैं सजदे में नहीं था आप को धोखा हुआ होगा — Dushyant Kumar
देर से ही आ गया हम को दुनिया का चलन झूठ भी कहते नहीं और सदाकत छोड़ दी — Ali Mohammed Shaikh
इश्क़ इकलौती वो मज़हब है जिस के उम्मती यहाँ बे-वफ़ा की भी इबादत करते है ता-दम-ए-पसीं — A R Sahil "Aleeg"
मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में — Anis shah anis
तिरे वा'दों पे कहाँ तक मिरा दिल फ़रेब खाए कोई ऐसा कर बहाना मिरी आस टूट जाए — Fana Nizami Kanpuri
झूट रौशन है कि सच्चाई नहीं जानते हैं लोग अब वहम-ओ-गुमाँ को ही यक़ीं जानते हैं — Sultan Akhtar
ये समझ के माना है सच तुम्हारी बातों को इतने ख़ूब-सूरत लब झूट कैसे बोलेंगे — Shahzad Ahmad