Top 20 Khudkushi Shayari

Khudkushi shayari reflects the deepest layers of emotional pain, where a person feels lost, broken, and disconnected from life itself. It is not about glorifying darkness, but expressing those silent struggles that often remain unspoken. Through these lines, people find a way to release their दर्द, share their inner battles, and feel a little less alone.

दिन गुजारूंँ आप के बिन ये तो था मुश्किल बहुत ख़ुद ख़ुशी से मर गया मैं, ख़ुद-कुशी आसान थी — Shubham Seth
उदासी का सबब उस सेे जो हम तब पूछ लेते वजह फिर पूछनी पड़ती न शायद ख़ुद-कुशी की — Dipendra Singh 'Raaz'
जब ख़ुद-कुशी न कर सका वो अपने दुख से तब उस को किसी ने यार मिरा दुख बता दिया — NISHKARSH AGGARWAL
जान लेने है राज़ जब उस के और करनी है ख़ुद-कुशी मैं ने — Jitendra "jeet"
तुझ सेे बिछड़ूँगा ग़म मनाऊँगा ख़ुद-कुशी पर नहीं करूँँगा मैं — Shajar Abbas
कोई उम्मीद जब नहीं होती होती है एक ख़ुद-कुशी उम्मीद — Anjali Sahar
दर्द तो कुछ भी नहीं था जो ज़माने ने दिया वक़्त पे ख़ामोश होना ख़ुद-कुशी से कम नहीं — Ganesh gorakhpuri
इस क़दर कर गया ख़ुद-कुशी इश्क़ में मौत आई मगर मौत हैरान है — Trinetra Dubey
ख़ुद-कुशी कैसे करूँँ पूछा जो उस ने कह दिया जाओ, किसी से इश्क़ कर लो — A R Sahil "Aleeg"
दिल मिरा वो घर है सौरभ ख़ुद-कुशी जिस में हुई कम किराए पर भी इस में कौन रहने आएगा — sourabh meena
ख़ुद-कुशी तो हराम है लेकिन इश्क़ कर लो किसी से तुम आसिफ़ — Asif Kaifi
ख़ुद-कुशी की धूप लगती जब मुझे साया तब माँ–बाप का कर लेता हूँ — Vardaan
जब से इक शख़्स हम सेे बिछड़ा है ख़ुद से नफ़रत सी हो गई है हमें — Shajar Abbas