तुम ने क्यूँ हँस के मुझे एक नज़र देख लिया
आज क्या आ गई जी में जो इधर देख लिया
हम किस उम्मीद पे आइंदा कोई आह करें
हम ने किस आह को मम्नून-ए-असर देख लिया
करवटें लेते हुए तुम भी तसव्वुर में मिले
तुम को भी ज़ीनत-ए-आग़ोश-ए-नज़र देख लिया
तेरे बीमार को क्यूँ देखने आए थे तबीब
प्यार की आँख से तू ने न उधर देख लिया
क्यूँ ख़फ़ा होते हो क्यूँ पड़ गई माथे पे शिकन
क्या हुआ चश्म-ए-मोहब्बत से अगर देख लिया
गिरती पड़ती लब-ए-'क़ैसर' से दुआ निकली है
ये ही आसार-ए-असर हैं तो असर देख लिया
— Qaisar Haideri Dehlvi















