मुझे झूठा भरोसा फिर दिलाया जा रहा है
मिरे दुख का तमाशा क्यूँ बनाया जा रहा है
तिरे होते हुए मुझ को उदासी खा रही है
तिरे होते हुए मुझ को सताया जा रहा है
किसी से है मुहब्बत और हुई शादी किसी से
नए से शख़्स से रिश्ता निभाया जा रहा है
वो जिस से बोलने में काँपते थे होंठ मेरे
उसी द्वारा मुझे अब चुप कराया जा रहा है
— Rudransh Trigunayat















