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तुम्हें ज़रूर कोई चाहतों से देखेगा - Subhan Asad

तुम्हें ज़रूर कोई चाहतों से देखेगा
मगर वो आँख हमारी कहाँ से लाएगा

तुम्हारे साथ ये मौसम फ़रिश्तों जैसा है
तुम्हारे बाद ये मौसम बहुत रुलाएगा

Subhan Asad
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Aankhein Shayari

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