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Muntazir shrey
SHER
अगर ये इश्क़ वाक़ई में आरज़ी नहीं है जावेदानी है
कभी तुम्हारे ज़ेहनी-इंतिशार से नहीं निकलने वाला मैं
Muntazir shrey
10
SHER
कुछ तो करें ये दर्द-मंदी शाइरों से लुत्फ़कार
नाकाम लोगों की फ़क़त ग़ज़लें मुकम्मल होती हैं
Muntazir shrey
9
GHAZAL
गई इस रुत तलक मेरा भी इक ग़म-ख़्वार था कोई
अजब इस हद तलक ज़ेर-ए-असर मेरे रहा कोई
Muntazir shrey
8
SHER
इस वज्ह हम को आइने से है गुरेज़
जो बा-नदामत देखते हैं हम हमें
Muntazir shrey
7
SHER
जो गई थी रूठ कर लहजे से मेरे उस का शौहर
अब मनाता है उसे अश'आर मेरे ही सुना कर
Muntazir shrey
6
SHER
शहर भर में हमारे बस अब आप के
हुस्न-ए-सीरत की ही सुर्खियाँ उड़ती हैं
Muntazir shrey
5
GHAZAL
बे-असर ही रहे हर हकीमी शिफ़ा
इश्क़ वालों को है ये सुख़न ही शिफ़ा
Muntazir shrey
4
SHER
कभी हम मुख़ातब नहीं कर सके जिस को उस शख़्स का
गुनाह-ए-कबीरा है कोई किया है तसव्वुर अगर
Muntazir shrey
3
SHER
क्या था बातिन को ज़ाहिर भी हम रखते गर
हम ने आसूदगी रुख़ पे दायम रखी
Muntazir shrey
2
SHER
कहीं तन्हाई घर की छोड़ हम बाहर नहीं जाते
हमारी उम्र में तो लोग मुड़ कर घर नहीं जाते
Muntazir shrey
1
Parvez Zaami
Ankit Dixit
divya 'sabaa'
Bhoomi Srivastava
Shreya Shivmurti
Krish Gour 'Jazbaat'
Dr Saniya Tasnim
Saahir
NEERAJ SAINI
Ved prakash Pandey