MIR SHAHRYAAR

MIR SHAHRYAAR

@Shahryaar

MIR SHAHRYAAR shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in MIR SHAHRYAAR's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal
लबों को सी के हर दम पीता हूँ ख़ून-ए-जिगर अपना
दर-ओ-दीवार से अब फोड़ता हूँ यारो सर अपना

किसे मुजरिम कहूँ किस को सज़ा दूँ ऐ दिल-ए-मुंसिफ़
ख़ुद अपने हाथों से मैं ने जलाया है ये घर अपना

अभी इन कहकशाओं से बहुत आगे गुज़रना है
यूँ ही चलता रहे बस शब के ऐ तारो सफ़र अपना

यूँ दर्द-ए-दिल सुनाने को फ़साने हैं बहुत लेकिन
उसे फ़ुर्सत कहाँ रखना है क़िस्सा मुख़्तसर अपना

किसी से क्या गिला रक्खें किसी से क्या शिकायत हो
जिसे आना हो आ जाएँ खुला रहता है दर अपना

कोई उम्मीद क्या रक्खें इलाज-ए-दर्द-ए-उल्फ़त की
कि ख़ुद भी इस मरज़ में मुब्तला है चारागर अपना

गुज़रते वक़्त की धुन ने भी धुँधलाए नहीं मंज़र
हरा होता रहा पल पल वो यादों का शजर अपना

मैं शीशा हूँ सुना है तू भी शीशों का मसीहा है
लो आया टूट के मैं अब दिखा दे तू हुनर अपना
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MIR SHAHRYAAR
अजब इक हश्र बरपा है मुझमें
रोज़ इक शख़्स मरता है मुझमें

अपनी परवाह क्यों करूँ आख़िर
वो था ही कब जो मेरा है मुझमें

अब कहीं कुछ धुआँ नहीं उठता
क्या ख़बर कौन जलता है मुझमें

मेरा भी जी बहलता है उसी से
अब भला क्या अनोखा है मुझमें

मुझको इक लम्हा भी क़रार नहीं
जाने अब कौन टूटा है मुझमें

ढूँढता हूँ तेरा वजूद मगर
अपना ही आप बिखरा है मुझमें

आग का एक दरिया है वो और
आग का दरिया बहता है मुझमें

मेरी साँसों ज़रा पता तो करो
मुझी से कौन लड़ता है मुझमें

बुझ नहीं सकता एक जाम से मैं
प्यास का जलता सहरा है मुझमें

मैं किसी दुनिया में नहीं हूँ मगर
सच ये है सारी दुनिया है मुझमें

इस भरी बज़्म में भी चैन नहीं
कोई तो है जो तन्हा है मुझमें
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