Ejaaz Ahamd Ejaaz

Ejaaz Ahamd Ejaaz

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Ejaaz Ahamd Ejaaz shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Ejaaz Ahamd Ejaaz's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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हुस्न की रीतें इश्क़ की रस्में छोटे बच्चे क्या जानें
शोख़ अदाएँ मुबहम बातें छोटे बच्चे क्या जानें

सैर हुए तो हँस लेते हैं भूक लगी तो रोते हैं
सुब्ह-ए-बहाराँ भीगी रातें छोटे बच्चे क्या जानें

कोह समुंदर सहरा जंगल ख़ूब समझ लेते हैं लेकिन
कैसी ज़ालिम हैं ये ख़लाएँ छोटे बच्चे क्या जानें

सच्चाई है इन का मज़हब अपनी ख़ता भी कह लेते हैं
झूट ग़बन धोके की राहें छोटे बच्चे क्या जानें

परियों के अफ़्साने सुन कर शहज़ादे बन बैठ गए
तल्ख़ हक़ाएक़ वक़्त की शक्लें छोटे बच्चे क्या जानें

लोरी से 'एजाज़' वो अक्सर अपना जी बहलाते हैं
गीत ग़ज़ल क़ितए' और नज़्में छोटे बच्चे क्या जानें
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Ejaaz Ahamd Ejaaz
दिन भी है रात भी है मेरे साथ
तरह में सादगी है मेरे साथ

दिल-रुबा दिल-लगी है मेरे साथ
इस लिए आगही है मेरे साथ

रात भी जागती है मेरे साथ
ग़म सरासर ख़ुशी है मेरे साथ

आरज़ू नाचती है मेरे साथ
शाइरी मंचली है मेरे साथ

आश्ना अजनबी है मेरे साथ
इक अनोखी हँसी है मेरे साथ

वक़्त की ख़ामुशी है मेरे साथ
एक बस्ती बसी है मेरे साथ
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Ejaaz Ahamd Ejaaz
सवाल तुझ से शब-ओ-रोज़ मेरा चलता रहा
जवाब तेरा हवाओं में मुझ को मिलता रहा

फ़लक पे चाँद सितारों का कारवाँ भी बुझा
तुम्हारी याद का लेकिन चराग़ जलता रहा

क़रीब-ए-मर्ग जो देखा तो पास कोई न था
तमाम उम्र ये फिर कौन साथ चलता रहा

बला के हब्स में सारी ज़मीन सूख गई
मगर ये प्यार का पौदा था फिर भी फलता रहा

मैं बेवफ़ा भी कहूँ किस तरह तुझे जानाँ
तू बन के बाद-ए-सबा रोज़ मुझ से मिलता रहा

मैं ए'तिबार मोहब्बत का तेरी क्या करता
बयान तेरा तो हर रोज़ ही बदलता रहा

रफ़ू मैं करता भी 'एजाज़' कैसे ज़ख़्मों को
ज़बाँ का ज़ख़्म था ये गुफ़्तुगू से सिलता रहा
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Ejaaz Ahamd Ejaaz
फ़लक पे शाम ढले जो चमकने लगते हैं
वो तेरी आँखों में आ कर दमकने लगते हैं

सुकूत-ए-शब मैं तिरा नाम जब भी लेता हूँ
सहीफ़े इश्क़ के दिल पर उतरने लगते हैं

ग़मों की काली घटाओं को चीर कर जानाँ
तिरी तजल्ली के सूरज दहकने लगते हैं

चमन चमन में खिले फूल ले के नाम तिरा
तसव्वुरात के गुलशन महकने लगते हैं

तिरी सदाओं के घुंघरू फ़ज़ा में यूँ छनके
कि जैसे बाग़ में बुलबुल चहकने लगते हैं

तू बे-इरादा भी जब ज़ुल्फ़ अपनी झटकाए
सुलगते दश्त पे बादल बरसने लगते हैं

तू जान तोड़ के लेती है जब भी अंगड़ाई
ख़ुतूत-ए-जिस्म ख़ला में उभरने लगते लगते हैं

तिरे जुनूँ का भी 'एजाज़' क्या मुदावा हो
कि छील लेते हो जब ज़ख़्म भरने लगते हैं
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Ejaaz Ahamd Ejaaz
चले थे घर से तो हम दर्द की दवा के लिए
पड़े हैं रस्ते में तेरे मगर दुआ के लिए

मबादा शब की सियाही ज़मीं को खा जाए
नक़ाब रुख़ से उठा दो ज़रा ख़ुदा के लिए

कोई चराग़ तो आँधी से बच के निकलेगा
जला दिए हैं बहुत से दिए हवा के लिए

यहाँ तो रोज़ नई आफ़तों से पाला है
'हुसैन' कितने अब आएँगे कर्बला के लिए

वो जिस ने तूर पे मूसा को बे-क़रार किया
तड़प रही है नज़र फिर उसी अदा के लिए

ज़मीं का सीना तो शोलों की मिस्ल जलता रहा
तरस के चल दिए 'एजाज़' इक घटा के लिए
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Ejaaz Ahamd Ejaaz
सदाक़तों के पयम्बर गए रसूल गए
ख़ुदी की हुर्मत-ए-अफ़ज़ल गई उसूल गए

जो बुल-हवस थे सर-ए-आम दनदनाते रहे
जो हक़-परस्त थे सब फाँसीयों पे झूल गए

गिला फ़क़त है ये ज़ाहिद की पारसाई से
ज़रा सा वक़्त पड़ा उन के सब उसूल गए

ख़िज़र से हम भी मिला कर क़दम चले थे मगर
मसाफ़तों की तवालत से साँस फूल गए

तुम्हारे जाने से हर इक कली का रंग उड़ा
चमन से फ़स्ल-ए-बहाराँ गई तो फूल गए

रह-ए-हयात में लाखों थे हम-सफ़र 'एजाज़'
किसी को याद रखा और किसी को भूल गए
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Ejaaz Ahamd Ejaaz