Jawwad Sheikh

Jawwad Sheikh

कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है
फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है

तुझसे जब मिलकर भी उदासी कम नहीं होती
तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है

  • Sher
  • Ghazal

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