बस मुझे रब्त इसी बात से रखना होगा
तुम कहो चुप मुझे ख़ामोश ही होना होगा
हम सितम देख नहीं पाते सहेंगे कैसे
जब हमें साथ किसी और के रहना होगा
नाव में दूर सफ़र लोग नहीं करते अब
जानते हैं की अगर डूबे तो मरना होगा
उम्र भर मेरी उदासी के लिए काफ़ी है
जो सबब मेरी ख़मोशी के लिए काफ़ी है
जान दे देंगे अगर आप कहेंगे हमसे
जान देना ही मुआफ़ी के लिए काफ़ी है
हो गया हूँ मैं भी शामिल उदास लोगों में
लगने लग गया है अब दिल उदास लोगों में
ये जमात तो है बस अक़्ल-मंद लोगों की
होते ही नहीं है जाहिल उदास लोगों में
बात ही नहीं करते सब ख़मोश रहते हैं
दिन गुज़ारना है मुश्किल उदास लोगों में
इंतिज़ार में बैठे लोग सब तुम्हारे है
फूल की तरह जा कर खिल उदास लोगों में
कैसे कह दिया है सिगरेट को बुरा तुमने
इस नशे के है सब काइल उदास लोगों में
भर गई है पूरी दुनिया उदास लोगों से
एक मैं ही हूँ बस खुश दिल उदास लोगों में
क़त्ल खुद का करते हैं वो भी अपने हाथों से
सब भरे पड़े है क़ातिल उदास लोगों में
तुम बचाकर भी मुझे छोड़ोगे तन्हा इसलिए
मै हूँ जिस भी हाल में मुझको उसी में छोड़ दो
तेरे बस में जो भी कुछ है वो सभी बर्बाद कर
मैंने जैसे की है वैसे ज़िंदगी बर्बाद कर
इस घड़ी दो काम कर सकता है तू हर हाल में
चूमना है चूम ले! या तीरगी बर्बाद कर
मैं ग़ज़ल कहता हूँ जिसके काफ़िया हैं राम जी
शायरी में इक नया सा ज़ाविया हैं राम जी
लड़ रही अंदर ही अंदर युध्द जग के रीत से
जो कभी हारी नहीं थी वो सिया हैं राम जी
जब आँख भर के आप को देखा लगा कि बस
कह दूँ मैं आपसे तभी अच्छा लगा कि बस
कहता रहा था वो भी मिरा साथ देगा पर
जो इक ज़रा सा पैर में कांटा लगा कि बस
अंदाज़ हम लगा ही नहीं सकते थे कभी
इतना हसीन आपका चेहरा लगा कि बस
मुझको यक़ीन इश्क़ कि हर बात पर ही था
फिर इस यक़ीन से मुझे धक्का लगा कि बस
तुमने मज़ाक मे जो कहा छोड़ दो मुझे
मुझको मज़ाक भी तेरा ऐसा लगा कि बस
मैं हारता नहीं किसी कीमत पे दिल के फिर
माथे से उसके जा मेरा माथा लगा कि बस
आकाश आज आपकी बाहों में मर गया
इक टूटता हुआ सा वो तारा लगा कि बस