किया कर जिस्म की अपने हिफ़ाज़तये मिट्टी रूह का घर है मेरी जाँगिला कैसा जहाँ रुस्वा करे गरये दुनिया तो सितमगर है मेरी जाँ— Ajeetendra Aazi Tamaam