0

Blogs

शायरी सीखें

शायरी सीखें

शायरी और शरबत दोनों का मामला ज़्यादा अलग नहीं है। शरबत का मज़ा तब और बढ़ जाता है जब स्वाद और सेहत दोनों मौजूद हो, शायरी में भी हू-ब-हू यही तरकीब काम करती है। शायरी का स्वाद यानी ख़याल तो शायर के हाथों में क़ुदरत ने दिया है लेकिन सेहत वाला राज़ जानकर शायर इस शरबत को और मज़ेदार बना सकता है। इस Blog Series में सीखिए शायरी का सेहत वाला राज़।

शायरी में 32 प्रचलित बहर

शायरी में 32 प्रचलित बहर

इस series में हम उर्दू शायरी में प्रचलित 32 बहरों को एक-एक कर Detail में जानेंगे, और साथ ही साथ हर Blog में उस बहर पे लिखी हुई बहुत सी प्रचलित ग़ज़लें भी देखेंगे। इनके अलावा बहरों के nomenclature को भी बारीकी से देखेंगे। यानी कि इस series से आपको बहरों का अच्छा ख़ासा इल्म तो होगा ही, आप उनका नामकरण भी सीख जाएँगे। चलिए कुल मिलाकर इल्म में इज़ाफ़ा ही हो रहा है, यही हमारी भी कोशिश है।

Kaif Uddin Khan

Kaif Uddin Khan

February 3, 2023

उर्दू ग़ज़ल और इज़ाफ़त

उर्दू ग़ज़ल और इज़ाफ़त

आज हम इस blog में उर्दू भाषा में इस्तेमाल होने वाले नियम “इज़ाफ़त” के बारे में बात करेंगे। एक अच्छी और मुकम्मल ग़ज़ल कहने के लिए इज़ाफ़त को समझना उतना ही ज़रूरी है जितना कि बहर को समझना। लेकिन उससे पहले सतही तौर पर ये समझ लेते हैं कि इज़ाफ़त क्या होती है।

Nadeem Khan

Nadeem Khan

August 9, 2022

राहत इंदौरी: एक ख़ुदरंग शायर

राहत इंदौरी: एक ख़ुदरंग शायर

राहत, एक ऐसी शख़्सियत है जिसके नाम में ही सुकून है और जो राहत साहब को जानते हैं, पढ़ते हैं, सुनते हैं, समझते हैं, उनके लिए यह सुकून नहीं जुनून है और यही जुनून उनकी शायरी में भी झलकता है

Krishnakant Kabk

Krishnakant Kabk

August 9, 2022

ग़ालिब कौन है?

ग़ालिब कौन है?

इश्क़ के इज़हार से लेकर इश्क़ के नाकाम होने तक या फिर ज़िंदगी के फ़लसफ़े से लेकर मौत तक हर मौज़ूअ' पर अश'आर कहकर ग़ालिब ने साबित किया है कि शायरी में कोई बंदिश नहीं होती और बंदिश होती भी हो तो ग़ालिब ने उस बंदिश को तोड़कर मौत के बाद के हालात पर भी अश'आर कहे, जिसके बारे में हम सोच भी नहीं सकते।

Krishnakant Kabk

Krishnakant Kabk

August 9, 2022

"शायर" या "बॉलीवुड गीतकार"?

"शायर" या "बॉलीवुड गीतकार"?

जो शायर है वो Lyricist भी है लेकिन जो Lyricist है वो शायर हो ये ज़रूरी नहीं है। इस बात को समझने के बाद आपको तय करना होगा कि आप शायर बनना चाहते हैं या Lyricist

Balmohan Pandey

Balmohan Pandey

August 9, 2022

शायरी में करियर

शायरी में करियर

अच्छी शायरी अपडेट नहीं हो रही उस तेज़ी से। Openmicers सिंपल टॉपिक ले आते हैं लेकिन एक चीज़ से मात खा जाते हैं जो शायरों के पास ही है- craft!! अच्छे क्राफ्ट में ढाली गयी बात ज़्यादा दिन तक याद रहती है और ज़्यादा असर रखती है।

Vibhat Kumar

Vibhat Kumar

August 9, 2022

शाइरी : एक ज़ाती ज़रूरत

शाइरी : एक ज़ाती ज़रूरत

एक बुनियादी सवाल अक्सर उठता रहता है कि शाइरी में दिल का ज़्यादा दख़्ल है या दिमाग़ का? और दोनों का है तो कितना दिल का और कितना दिमाग़ का? दुनिया अल्फ़ाज़ों में कहें तो क्या ज़ेहनी कुश्ती करके यानी बुनियादी नियम सीखकर क्या कोई मीर ओ गालिब़ बनने का दावा कर सकता है?

Vibhat Kumar

Vibhat Kumar

August 9, 2022

जौन को जौन ही से ख़तरा है

जौन को जौन ही से ख़तरा है

आज जौन एलिया कि शायरी को जौन एलिया से ही खतरा है। हम सब एलियाईओं का जौन जौन की शाइरी की बाकी परतों को खुलने ही नहीं दे रहा। हमलोग बस कुछ सतहें खोलकर समझ रहे हैं कि वाह जौन क्या कमाल शाइर है पर जौन यहाँ खत्म नहीं होता।

Vibhat Kumar

Vibhat Kumar

August 9, 2022

अगले ज़माने में कोई 'मीर' भी था

अगले ज़माने में कोई 'मीर' भी था

ये तो सच है कि आशिक का दिल तो बस माशूक की याद में रोता है पर आशिक अपने ग़म में औरों का ग़म तलाश लेता है। कहा जाता है ग़मों को रहने के लिए सबब के बहुत से सराय दरकार होते हैं। ये आशिक को दुनिया के ग़म तक खींच लाते हैं।

Vibhat Kumar

Vibhat Kumar

August 9, 2022

आज और मजाज़: इश्क़ और इंक़लाब

आज और मजाज़: इश्क़ और इंक़लाब

ये इंक़लाब में मोहब्बत का मिलना और मोहब्बत में इंक़लाबी रंग जिस शदीद लहजे में मजाज़ के यहाँ दिखता है , वो मानो ऐसा है कि गुलाब के फूल से जंग लड़ने की हिमाकत है और मजाज़ इस जुरअत पर खरे उतरते नज़र आते हैं। बकौल फिराक़, मजाज़ की शाइरी तरक्की पसंद शाइरी ( progressive poetry) का manifesto है।

Vibhat Kumar

Vibhat Kumar

August 9, 2022

"दाग़" दिल पर लगें तो अच्छे हैं

"दाग़" दिल पर लगें तो अच्छे हैं

आप इश्क़ क्यों करते हैं या इंसान इश्क़ क्यों करता है? अमूमन इंसान इस बात से नावाकिफ़ नज़र आता है | पर दाग़ कह रहे हैं कि मेरे इश्क करने का तो एक ही सबब है और एक ही मतलब है, कि दम निकल जाए हिचकियाँ आते आते | क्या यहाँ मुराद आशिक के दम निकलने से है? या माशूक़ के?

Vibhat Kumar

Vibhat Kumar

August 9, 2022

जौन एलिया: इश्क़ की क्लास

जौन एलिया: इश्क़ की क्लास

रूठने और मनाने की ऐसी अठखेलियाँ के जहाँ रिश्ता खत्म करने तक बात आ गई और फिर महबूब के इक बार गले में हाथ डालते ही जो शख्स पिघल जाए तो आपको क्या लगता है कि क्या वो शख्स जब नफ़रत करेगा तो क्या सतही नफ़रत करेगा? वो मुंह नोंच लेगा अपनी महबूबा का वहशत में।