0

Blogs

Nadeem Khan

Nadeem Khan

August 9, 2022

राहत इंदौरी: एक ख़ुदरंग शायर

राहत इंदौरी: एक ख़ुदरंग शायर

राहत, एक ऐसी शख़्सियत है जिसके नाम में ही सुकून है और जो राहत साहब को जानते हैं, पढ़ते हैं, सुनते हैं, समझते हैं, उनके लिए यह सुकून नहीं जुनून है और यही जुनून उनकी शायरी में भी झलकता है

Atul Singh

Atul Singh

August 9, 2022

शायरी और नज़्म

शायरी और नज़्म

नज़्म जैसी कोई दूसरी विधा भी नहीं हैं, इसका अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि बड़े बड़े शाइर जो रंज, जंग, रक़ीब, माशूक आदि पर ग़ज़लें लिख कर तंज़ कसते हैं, वो भी तरन्नुम में नज़्म गाने को मज़बूर हो जाते हैं। यही है नज़्म की ख़ूबसूरती।

Krishnakant Kabk

Krishnakant Kabk

August 9, 2022

ग़ालिब कौन है?

ग़ालिब कौन है?

इश्क़ के इज़हार से लेकर इश्क़ के नाकाम होने तक या फिर ज़िंदगी के फ़लसफ़े से लेकर मौत तक हर मौज़ूअ' पर अश'आर कहकर ग़ालिब ने साबित किया है कि शायरी में कोई बंदिश नहीं होती और बंदिश होती भी हो तो ग़ालिब ने उस बंदिश को तोड़कर मौत के बाद के हालात पर भी अश'आर कहे, जिसके बारे में हम सोच भी नहीं सकते।

Krishnakant Kabk

Krishnakant Kabk

August 9, 2022

"शायर" या "बॉलीवुड गीतकार"?

"शायर" या "बॉलीवुड गीतकार"?

जो शायर है वो Lyricist भी है लेकिन जो Lyricist है वो शायर हो ये ज़रूरी नहीं है। इस बात को समझने के बाद आपको तय करना होगा कि आप शायर बनना चाहते हैं या Lyricist

Krishnakant Kabk

Krishnakant Kabk

August 9, 2022

रदीफ़-क़ाफ़िया दोष और निवारण

रदीफ़-क़ाफ़िया दोष और निवारण

एक छोटी सी ग़लती जब ग़ज़ल को ख़ारिज करवाती है तो शायर को बड़ी ठेस पहुँचती है और पहुँचे भी क्यों नहीं? आख़िर मेहनत और दिल से कही बात का ख़ारिज हो जाना मामूली नहीं है। इस हादसे से बचने के लिए कुछ कोशिशें की जा सकती हैं जिनमें से रदीफ़ और क़ाफ़िया का दोष निवारण करना सबसे पहला है।

Haider Khan

Haider Khan

August 9, 2022

बहर-ए-मीर

बहर-ए-मीर

वैसे तो यह सत्रहवीं शताब्दी से चली आ रही है लेकिन इसका सब से ज़्यादा इस्तेमाल अठारवीं शताब्दी में उर्दू के उस्ताद शाइर मीर ने किया है, उन्होंने इस बहर में सैकड़ों ग़ज़लें कहीं हैं इसलिए हम इसे बहर-ए-मीर के नाम से भी जानते हैं।

Haider Khan

Haider Khan

August 9, 2022

बहर में मिलने वाली एक विशेष छूट: अलिफ़ वस्ल

बहर में मिलने वाली एक विशेष छूट: अलिफ़ वस्ल

अलिफ़ वस्ल एक ऐसी स्तिथि है जिस में जब भी कोई शब्द व्यंजन पे ख़त्म होता है यानी जिस पर कोई मात्रा नहीं हो और उसके बाद के शब्द का पहला अक्षर कोई स्वर हो तो उच्चारण अनुसार पहले शब्द के आख़री व्यंजन और दूसरे शब्द के पहले स्वर का मिलाप हो जाता है।

Krishnakant Kabk

Krishnakant Kabk

August 9, 2022

ख़याल से ग़ज़ल तक

ख़याल से ग़ज़ल तक

ख़याल वो कच्ची मिट्टी है जिसे बहर नाम के ढाँचे में ढालकर शे'र नाम की ईंटें बनाई जाती है और इन्हीं ईंटों से ग़ज़ल जैसे ख़ूबसूरत आशियानें बनते हैं। इसी के साथ हम ग़ज़ल में मिलने वाली छूट यानी सहूलियत की भी बात करेंगे।

Krishnakant Kabk

Krishnakant Kabk

August 9, 2022

बहर में शायरी

बहर में शायरी

अभी तक के सभी Blog में आपने बहुत सी बातें सीखी है या यूँ कह लीजिए कि आपने बहुत सारे फल उगा लिए हैं, उन सब बातों को एक गिलास में मिलाकर अब मैं आपको शायरी नाम का शरबत बनाने की तरकीब बताऊंगा।

Balmohan Pandey

Balmohan Pandey

August 9, 2022

शायरी में करियर

शायरी में करियर

अच्छी शायरी अपडेट नहीं हो रही उस तेज़ी से। Openmicers सिंपल टॉपिक ले आते हैं लेकिन एक चीज़ से मात खा जाते हैं जो शायरों के पास ही है- craft!! अच्छे क्राफ्ट में ढाली गयी बात ज़्यादा दिन तक याद रहती है और ज़्यादा असर रखती है।

Vibhat Kumar

Vibhat Kumar

August 9, 2022

उर्दू शायरी की बारीकियां

उर्दू शायरी की बारीकियां

Onomatopoeia या paleontology को पढ़ते वक्त क्या आप भी शब्द को तोड़कर पढ़ने की कोशिश करते हैं ताकि फिर बाद में अंदाज़ा लगा सकें कि पढ़ना कैसे है? उर्दू-हिन्दी में भी लफ़्ज़ को अगर सही तरीके से तोड़कर न पढ़ा जाए तो मतलब अलग अलग निकल सकते हैं।

Vibhat Kumar

Vibhat Kumar

August 9, 2022

उर्दू को हिंदी स्क्रिप्ट में कैसे लिखें और पढ़ें

उर्दू को हिंदी स्क्रिप्ट में कैसे लिखें और पढ़ें

अगर आपको पता चलता है कि आप कभी शाइर नहीं हो सकते तो क्यों मानव जाति का वक्त बर्बाद कर रहे हैं, हराम की ज़िन्दगी की तलब़ क्यों है आपको। जाइए कुछ और रोज़गार देखिए। 

Vibhat Kumar

Vibhat Kumar

August 9, 2022

शाइरी : एक ज़ाती ज़रूरत

शाइरी : एक ज़ाती ज़रूरत

एक बुनियादी सवाल अक्सर उठता रहता है कि शाइरी में दिल का ज़्यादा दख़्ल है या दिमाग़ का? और दोनों का है तो कितना दिल का और कितना दिमाग़ का? दुनिया अल्फ़ाज़ों में कहें तो क्या ज़ेहनी कुश्ती करके यानी बुनियादी नियम सीखकर क्या कोई मीर ओ गालिब़ बनने का दावा कर सकता है?

Vibhat Kumar

Vibhat Kumar

August 9, 2022

जौन को जौन ही से ख़तरा है

जौन को जौन ही से ख़तरा है

आज जौन एलिया कि शायरी को जौन एलिया से ही खतरा है। हम सब एलियाईओं का जौन जौन की शाइरी की बाकी परतों को खुलने ही नहीं दे रहा। हमलोग बस कुछ सतहें खोलकर समझ रहे हैं कि वाह जौन क्या कमाल शाइर है पर जौन यहाँ खत्म नहीं होता।

Vibhat Kumar

Vibhat Kumar

August 9, 2022

अगले ज़माने में कोई 'मीर' भी था

अगले ज़माने में कोई 'मीर' भी था

ये तो सच है कि आशिक का दिल तो बस माशूक की याद में रोता है पर आशिक अपने ग़म में औरों का ग़म तलाश लेता है। कहा जाता है ग़मों को रहने के लिए सबब के बहुत से सराय दरकार होते हैं। ये आशिक को दुनिया के ग़म तक खींच लाते हैं।

Vibhat Kumar

Vibhat Kumar

August 9, 2022

आज और मजाज़: इश्क़ और इंक़लाब

आज और मजाज़: इश्क़ और इंक़लाब

ये इंक़लाब में मोहब्बत का मिलना और मोहब्बत में इंक़लाबी रंग जिस शदीद लहजे में मजाज़ के यहाँ दिखता है , वो मानो ऐसा है कि गुलाब के फूल से जंग लड़ने की हिमाकत है और मजाज़ इस जुरअत पर खरे उतरते नज़र आते हैं। बकौल फिराक़, मजाज़ की शाइरी तरक्की पसंद शाइरी ( progressive poetry) का manifesto है।

Vibhat Kumar

Vibhat Kumar

August 9, 2022

"दाग़" दिल पर लगें तो अच्छे हैं

"दाग़" दिल पर लगें तो अच्छे हैं

आप इश्क़ क्यों करते हैं या इंसान इश्क़ क्यों करता है? अमूमन इंसान इस बात से नावाकिफ़ नज़र आता है | पर दाग़ कह रहे हैं कि मेरे इश्क करने का तो एक ही सबब है और एक ही मतलब है, कि दम निकल जाए हिचकियाँ आते आते | क्या यहाँ मुराद आशिक के दम निकलने से है? या माशूक़ के?

Vibhat Kumar

Vibhat Kumar

August 9, 2022

जौन एलिया: इश्क़ की क्लास

जौन एलिया: इश्क़ की क्लास

रूठने और मनाने की ऐसी अठखेलियाँ के जहाँ रिश्ता खत्म करने तक बात आ गई और फिर महबूब के इक बार गले में हाथ डालते ही जो शख्स पिघल जाए तो आपको क्या लगता है कि क्या वो शख्स जब नफ़रत करेगा तो क्या सतही नफ़रत करेगा? वो मुंह नोंच लेगा अपनी महबूबा का वहशत में।