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Kaif Uddin Khan
December 8, 2023

Poetistic shayari rejection reasons and its' solutions
इस blog में हमारी वेबसाइट पर भेजी जाने वाली शायरी के अस्वीकार होने के कारणों के बारे में बात करेंगे। आप में से कई नए शायर हमारी ओर से दिए जाने वाले कारणों को समझ पाने में असमर्थ होते हैं। इस blog के ज़रिए हम आपको उन ग़लतियों को ठीक करना सिखाएँगे, जो आपसे अनजाने में हो जाती है या जिनकी जानकारी आपको न
Kaif Uddin Khan
December 21, 2023

How to write your first Ghazal
"बात ये है कि आदमी शाइर या तो होता है या नहीं होता" ये शेर इस बात को तो पुख़्ता करता है कि शायर बनना कोई ऐसा काम नहीं है जो किताबी ज्ञान से पढ़ कर किया जाए। मगर शायरी के लिए ये ज़रूरी है कि शायर अरूज़ के नियमों का ध्यान रखते हुए, अपने ख़्यालों पर भी काम करे। कई सुख़नशनास लोग जब अपनी पहली ग़ज़ल लिखते हैं तो
Adnan Ali SHAGAF
October 18, 2023

बहर #9 बहर-ए-मुतक़ारिब मुसम्मन महज़ूफ़
आज हम हाज़िर हैं बहर सीरीज़ के नौवें ब्लॉग के साथ,पिछले ब्लॉग की बहर से मिलती हुई इस बहर का नाम है बहर-ए-मुतक़ारिब मुसम्मन महज़ूफ़। पिछली बहर की तरह ये बहर भी उर्दू शायरी में ख़ूब इस्तेमाल की गई है,कईं ख़ूबसूरत गाने और ग़ज़लें इसी बहर पर लिखी गयी हैं। आप भी इस ब्लॉग के माध्यम से इस बहर की बारीकियों को जान
Adnan Ali SHAGAF
October 10, 2023

बहर #8 बहर-ए-मुतक़ारिब मुसम्मन सालिम
"अकेले अकेले कहाँ जा रहे हो" मोहम्मद रफ़ी साहब का ये गाना तो आपने सुना ही होगा। क्या आप जानते हैं कि ये गाना भी बहर में है? और जिस बहर में है वो उर्दू शायरी की सबसे आसान और ख़ूब इस्तेमाल की जाने वाली बहरों में से एक है। बहर सीरीज़ के इस आठवें ब्लॉग में हम बात करने जा रहे हैं इसी गाने की बहर बहर-ए-मुतक़ा
Atul Singh
April 30, 2023

बहर #7 बहर-ए-मुतक़ारिब मुसद्दस सालिम
इस ब्लॉग में आप जानेंगे उर्दू शायरी की छोटी बहरों में से एक बहर-ए-मुतक़ारिब मुसद्दस सालिम के बारे में,आइए जानते हैं इस छोटी बहर के बड़े से नाम और इस पर लिखी गयी ग़ज़लों के बारे में।
Atul Singh
March 6, 2023

बहर #6 बहर-ए-मुज़ारे'अ मुसम्मन अख़रब मकफ़ूफ़ महज़ूफ़
आज के Blog में हम जिस बहर को detail में जानेंगे उसका नाम "मुज़ारे'अ मुसम्मन अख़रब मकफ़ूफ़ महज़ूफ़" है। यह काफ़ी लोकप्रिय बहर है, इसकी लोकप्रियता का अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि इस बहर में बॉलीवुड इंडस्ट्री की फ़िल्मों में बहुत से गीत लिखे गए हैं जो आमजन की ज़ुबान पर दशकों तक छाए रहे।
Kaif Uddin Khan
February 16, 2023

वाव-ए-अत्फ़
'वाव-ए-अत्फ़' (यानी 'और या ए लगाकर' दो शब्दों को कैसे जोड़ा जाता है) क्या होता है, 'वाव-ए-अत्फ़' के नियम क्या हैं, ये कहाँ पर लगाना चाहिए, कैसे इसे लगाकर आप अपनी शायरी में और भी ज़्यादा बेहतरी ला सकते हैं, सारी बातों के जवाब इस ब्लॉग में बड़े ही आसान लफ़्ज़ों में समझाए गए हैं
Kaif Uddin Khan
February 3, 2023

उर्दू ग़ज़ल और इज़ाफ़त
आज हम इस blog में उर्दू भाषा में इस्तेमाल होने वाले नियम “इज़ाफ़त” के बारे में बात करेंगे। एक अच्छी और मुकम्मल ग़ज़ल कहने के लिए इज़ाफ़त को समझना उतना ही ज़रूरी है जितना कि बहर को समझना। लेकिन उससे पहले सतही तौर पर ये समझ लेते हैं कि इज़ाफ़त क्या होती है।
Adnan Ali SHAGAF
January 21, 2023

बहर #5 बहर-ए-मुज़ारे'अ मुसम्मन अख़रब
आज का ब्लॉग काफ़ी इंटरेस्टिंग होने वाला है क्योंकि आज जिस बहर पर हम क्लास करेंगे उसमें nomenclature का part बहुत कम है साथ ही साथ वक़्फ़ा (यति/stoppage) और शिकस्त-ए-नारवा जैसी चीज़ों को जानेंगे जो इस बहर में लिखते समय ज़रूरी हैं।
Adnan Ali SHAGAF
December 28, 2022

बहर #4 बहर-ए-मुज़ारे'अ मुसम्मन मक़बूज़ मख़बून मक़तू'अ
अभी तक के ब्लॉग में हमने जिन बहरों के बारे में बात की थी उनमें एक मुरक्कब मुज़ाहिफ़ बहर भी थी।सो आज की क्लास में भी हम जिस बहर की बारीक-बीनी से छानपटक कर रहे होंगे वो भी एक मुरक्कब मुज़ाहिफ़ बहर है। जिसका नाम बहर-ए-मुज़ारे'अ मुसम्मन मक़बूज़ मख़बून मक़तू'अ है।
Atul Singh
December 17, 2022

बहर #3 कामिल मुसम्मन सालिम
आज की क्लास में हम जिस बहर को बारीकी से जानेंगे उसका नाम है कामिल मुसम्मन सालिम। इस बहर का नाम जितना आसान है, लिखना भी उतना ही आसान।इसी के साथ आज हम आपको बहर के nomenclature के नियम से भी रू-ब-रू कराएँगे।
Atul Singh
December 23, 2023

बहर #2 बहर-ए-ख़फ़ीफ मुसद्दस मख़बून अबतर
आज की क्लास में हम जिस बहर को बारीकी से जानेंगे उसका नाम है "ख़फ़ीफ मुसद्दस मख़बून अबतर"। आप सोच रहे होंगे यह कैसा अजीब नाम है और कितना भयावह है।यक़ीन मानिए आप जब इसका रुक्न रूप देखेंगे तो आपको यह बहर सबसे आसान लगेगी।चलिए फिर अब हम इस बहर का रुक्न रूप देखते हैं।
Atul Singh
December 21, 2023

बहर #1 हज़ज मुसम्मन सालिम
इस Blog में हम जिस बहर को detail में जानेंगे उसका नाम है "हज़ज मुसम्मन सालिम"। डरिए मत! ये नाम याद रखने की आपको ज़रूरत नहीं है। अगर आप उर्दू ग़ज़लें लिखते हैं तो मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूँ कि आप सभी ने इस बहर में ग़ज़ल व शेर ज़रूर लिखे होंगे।
Nadeem Khan
August 9, 2022

राहत इंदौरी: एक ख़ुदरंग शायर
राहत, एक ऐसी शख़्सियत है जिसके नाम में ही सुकून है और जो राहत साहब को जानते हैं, पढ़ते हैं, सुनते हैं, समझते हैं, उनके लिए यह सुकून नहीं जुनून है और यही जुनून उनकी शायरी में भी झलकता है
Atul Singh
August 9, 2022

शायरी और नज़्म
नज़्म जैसी कोई दूसरी विधा भी नहीं हैं, इसका अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि बड़े बड़े शाइर जो रंज, जंग, रक़ीब, माशूक आदि पर ग़ज़लें लिख कर तंज़ कसते हैं, वो भी तरन्नुम में नज़्म गाने को मज़बूर हो जाते हैं। यही है नज़्म की ख़ूबसूरती।
Krishnakant Kabk
August 9, 2022

ग़ालिब कौन है?
इश्क़ के इज़हार से लेकर इश्क़ के नाकाम होने तक या फिर ज़िंदगी के फ़लसफ़े से लेकर मौत तक हर मौज़ूअ' पर अश'आर कहकर ग़ालिब ने साबित किया है कि शायरी में कोई बंदिश नहीं होती और बंदिश होती भी हो तो ग़ालिब ने उस बंदिश को तोड़कर मौत के बाद के हालात पर भी अश'आर कहे, जिसके बारे में हम सोच भी नहीं सकते।
Krishnakant Kabk
August 9, 2022

"शायर" या "बॉलीवुड गीतकार"?
जो शायर है वो Lyricist भी है लेकिन जो Lyricist है वो शायर हो ये ज़रूरी नहीं है। इस बात को समझने के बाद आपको तय करना होगा कि आप शायर बनना चाहते हैं या Lyricist
Krishnakant Kabk
August 9, 2022

रदीफ़-क़ाफ़िया दोष और निवारण
एक छोटी सी ग़लती जब ग़ज़ल को ख़ारिज करवाती है तो शायर को बड़ी ठेस पहुँचती है और पहुँचे भी क्यों नहीं? आख़िर मेहनत और दिल से कही बात का ख़ारिज हो जाना मामूली नहीं है। इस हादसे से बचने के लिए कुछ कोशिशें की जा सकती हैं जिनमें से रदीफ़ और क़ाफ़िया का दोष निवारण करना सबसे पहला है।
Haider Khan
January 6, 2023

बहर-ए-मीर
वैसे तो यह सत्रहवीं शताब्दी से चली आ रही है लेकिन इसका सब से ज़्यादा इस्तेमाल अठारवीं शताब्दी में उर्दू के उस्ताद शाइर मीर ने किया है, उन्होंने इस बहर में सैकड़ों ग़ज़लें कहीं हैं इसलिए हम इसे बहर-ए-मीर के नाम से भी जानते हैं।
Haider Khan
August 9, 2022

बहर में मिलने वाली एक विशेष छूट: अलिफ़ वस्ल
अलिफ़ वस्ल एक ऐसी स्तिथि है जिस में जब भी कोई शब्द व्यंजन पे ख़त्म होता है यानी जिस पर कोई मात्रा नहीं हो और उसके बाद के शब्द का पहला अक्षर कोई स्वर हो तो उच्चारण अनुसार पहले शब्द के आख़री व्यंजन और दूसरे शब्द के पहले स्वर का मिलाप हो जाता है।
Krishnakant Kabk
August 9, 2022

ख़याल से ग़ज़ल तक
ख़याल वो कच्ची मिट्टी है जिसे बहर नाम के ढाँचे में ढालकर शे'र नाम की ईंटें बनाई जाती है और इन्हीं ईंटों से ग़ज़ल जैसे ख़ूबसूरत आशियानें बनते हैं। इसी के साथ हम ग़ज़ल में मिलने वाली छूट यानी सहूलियत की भी बात करेंगे।
Krishnakant Kabk
October 18, 2023

बहर में शायरी
अभी तक के सभी Blog में आपने बहुत सी बातें सीखी है या यूँ कह लीजिए कि आपने बहुत सारे फल उगा लिए हैं, उन सब बातों को एक गिलास में मिलाकर अब मैं आपको शायरी नाम का शरबत बनाने की तरकीब बताऊंगा।
Balmohan Pandey
August 9, 2022

शायरी में करियर
अच्छी शायरी अपडेट नहीं हो रही उस तेज़ी से। Openmicers सिंपल टॉपिक ले आते हैं लेकिन एक चीज़ से मात खा जाते हैं जो शायरों के पास ही है- craft!! अच्छे क्राफ्ट में ढाली गयी बात ज़्यादा दिन तक याद रहती है और ज़्यादा असर रखती है।
Vibhat Kumar
February 18, 2023

उर्दू शायरी की बारीकियाँ
Onomatopoeia या paleontology को पढ़ते वक्त क्या आप भी शब्द को तोड़कर पढ़ने की कोशिश करते हैं ताकि फिर बाद में अंदाज़ा लगा सकें कि पढ़ना कैसे है? उर्दू-हिन्दी में भी लफ़्ज़ को अगर सही तरीके से तोड़कर न पढ़ा जाए तो मतलब अलग अलग निकल सकते हैं।
Vibhat Kumar
August 9, 2022

उर्दू को हिंदी स्क्रिप्ट में कैसे लिखें और पढ़ें
अगर आपको पता चलता है कि आप कभी शाइर नहीं हो सकते तो क्यों मानव जाति का वक्त बर्बाद कर रहे हैं, हराम की ज़िन्दगी की तलब़ क्यों है आपको। जाइए कुछ और रोज़गार देखिए।
Vibhat Kumar
August 9, 2022

शाइरी : एक ज़ाती ज़रूरत
एक बुनियादी सवाल अक्सर उठता रहता है कि शाइरी में दिल का ज़्यादा दख़्ल है या दिमाग़ का? और दोनों का है तो कितना दिल का और कितना दिमाग़ का? दुनिया अल्फ़ाज़ों में कहें तो क्या ज़ेहनी कुश्ती करके यानी बुनियादी नियम सीखकर क्या कोई मीर ओ गालिब़ बनने का दावा कर सकता है?
Vibhat Kumar
August 9, 2022

जौन को जौन ही से ख़तरा है
आज जौन एलिया कि शायरी को जौन एलिया से ही खतरा है। हम सब एलियाईओं का जौन जौन की शाइरी की बाकी परतों को खुलने ही नहीं दे रहा। हमलोग बस कुछ सतहें खोलकर समझ रहे हैं कि वाह जौन क्या कमाल शाइर है पर जौन यहाँ खत्म नहीं होता।
Vibhat Kumar
January 14, 2025

अगले ज़माने में कोई 'मीर' भी था
ये तो सच है कि आशिक का दिल तो बस माशूक़ की याद में रोता है पर आशिक़ अपने ग़म में औरों का ग़म तलाश लेता है। कहा जाता है ग़मों को रहने के लिए सबब के बहुत से सराय दरकार होते हैं। ये आशिक़ को दुनिया के ग़म तक खींच लाते हैं।
Vibhat Kumar
August 9, 2022

आज और मजाज़: इश्क़ और इंक़लाब
ये इंक़लाब में मोहब्बत का मिलना और मोहब्बत में इंक़लाबी रंग जिस शदीद लहजे में मजाज़ के यहाँ दिखता है , वो मानो ऐसा है कि गुलाब के फूल से जंग लड़ने की हिमाकत है और मजाज़ इस जुरअत पर खरे उतरते नज़र आते हैं। बकौल फिराक़, मजाज़ की शाइरी तरक्की पसंद शाइरी ( progressive poetry) का manifesto है।
Vibhat Kumar
August 9, 2022

"दाग़" दिल पर लगें तो अच्छे हैं
आप इश्क़ क्यों करते हैं या इंसान इश्क़ क्यों करता है? अमूमन इंसान इस बात से नावाकिफ़ नज़र आता है | पर दाग़ कह रहे हैं कि मेरे इश्क करने का तो एक ही सबब है और एक ही मतलब है, कि दम निकल जाए हिचकियाँ आते आते | क्या यहाँ मुराद आशिक के दम निकलने से है? या माशूक़ के?
Vibhat Kumar
August 9, 2022

जौन एलिया: इश्क़ की क्लास
रूठने और मनाने की ऐसी अठखेलियाँ के जहाँ रिश्ता खत्म करने तक बात आ गई और फिर महबूब के इक बार गले में हाथ डालते ही जो शख्स पिघल जाए तो आपको क्या लगता है कि क्या वो शख्स जब नफ़रत करेगा तो क्या सतही नफ़रत करेगा? वो मुंह नोंच लेगा अपनी महबूबा का वहशत में।