Urdu and Hindi Poetry: Sher, Ghazal, Nazm | Poetistic
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तेरे लगाए हुए ज़ख़्म क्यूँँ नहीं भरते मेरे लगाए हुए पेड़ सूख जाते हैं
सैड
sad

ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है
रोमांटिक
romantic

कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी
लव
love

सफ़र में आख़िरी पत्थर के बा'द आएगा मज़ा तो यार दिसंबर के बा'द आएगा
मोटिवेशनल
motivational

ज़ेहन से यादों के लश्कर जा चुके वो मेरी महफ़िल से उठ कर जा चुके
ज़िंदगी
life
दिखाते हैं पड़ोसी मुल्क आँखें तो दिखाने दो कहीं बच्चों के बोसे से भी माँ का गाल कटता है
deshbhakti
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