Urdu and Hindi Poetry: Sher, Ghazal, Nazm
Today's top 5
#1
कू-ए-जानाँ में भला अब देखने को क्या बचा
सुन रहा हूँ आपने भी बे-वफ़ाई छोड़ दी
Nashir Naqvi
#2
भूचाल की धमकी का अगर डर है तो लोगों
इन कच्चे मकानों को गिरा क्यूँ नहीं देते
Gyan Prakash Vivek
#3
दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया
तुझ से भी दिल-फ़रेब हैं ग़म रोज़गार के
Faiz Ahmad Faiz
#4
मु-ए-जुज़ 'मीर' जो थे फ़न के उस्ताद
यही इक रेख़्ता-गो अब रहा है
Mushafi Ghulam Hamdani
#5
बचपन में हम ही थे या था और कोई
वहशत सी होने लगती है यादों से
Abdul Ahad Saaz
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