Urdu and Hindi Poetry: Sher, Ghazal, Nazm | Poetistic
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सफ़र में आख़िरी पत्थर के बा'द आएगा मज़ा तो यार दिसंबर के बा'द आएगा
मोटिवेशनल
motivational

तेरा चुप रहना मेरे ज़ेहन में क्या बैठ गया इतनी आवाज़ें तुझे दीं कि गला बैठ गया
सैड
sad

मैं चूमता हूँ तो वो हाथ खींच लेता है उसे पता है ये सीढ़ी कहाँ पे जानी है
रोमांटिक
romantic

गले मिलना न मिलना तो तेरी मर्ज़ी है लेकिन तेरे चेहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है
लव
love

क्यूँँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
ज़िंदगी
life
निगाह-ए-गर्म क्रिसमस में भी रही हम पर हमारे हक़ में दिसम्बर भी माह-ए-जून हुआ
फेस्टिव
festive
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