Urdu and Hindi Poetry: Sher, Ghazal, Nazm
Today's top 5
#1
ये मोहब्बत के महल तामीर करना छोड़ दे
मैं भी शहज़ादा नहीं हूँ तू भी शहज़ादी नहीं
Afzal Khan
#2
उस के हाथों में बस हम ही जँचते थे
दावा सोने का कंगन भी करता था
Vishal Bagh
#3
किसी को अपने अमल का हिसाब क्या देते
सवाल सारे ग़लत थे जवाब क्या देते
Muneer Niyazi
#4
सभी इन'आम नित पाते हैं ऐ शीरीं-दहन तुझ से
कभू तू एक बोसे से हमारा मुँह भी मीठा कर
Jurat Qalandar Bakhsh
#5
'दानिश' यूँँ तस्लीम नहीं करती दुनिया
अपने आप को साबित करना पड़ता है
Madan Mohan Danish
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