Urdu and Hindi Poetry: Sher, Ghazal, Nazm
Today's top 5
#1
हम आज राह-ए-तमन्ना में जी को हार आए
न दर्द-ओ-ग़म का भरोसा रहा न दुनिया का
Waheed Quraishi
#2
जानता हूँ एक ऐसे शख़्स को मैं भी 'मुनीर'
ग़म से पत्थर हो गया लेकिन कभी रोया नहीं
Muneer Niyazi
#3
हमें पढ़ाओ न रिश्तों की कोई और किताब
पढ़ी है बाप के चेहरे की झुर्रियाँ हम ने
Meraj Faizabadi
#4
सर-ज़मीन-ए-हिंद पर अक़्वाम-ए-आलम के 'फ़िराक़'
क़ाफ़िले बसते गए हिन्दोस्ताँ बनता गया
Firaq Gorakhpuri
#5
तू जो मिल जाए तो तक़दीर निगूँ हो जाए
यूँँ न था मैं ने फ़क़त चाहा था यूँँ हो जाए
Faiz Ahmad Faiz
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