Urdu and Hindi Poetry: Sher, Ghazal, Nazm
Today's top 5
#1
कभी मैं अपने हाथों की लकीरों से नहीं उलझा
मुझे मालूम है क़िस्मत का लिक्खा भी बदलता है
Bashir Badr
#2
ज़िन्दगी छीन ले बख़्शी हुई दौलत अपनी
तू ने ख़्वाबों के सिवा मुझ को दिया भी क्या है
Akhtar Saeed Khan
#3
क़सम जब उस ने खाई हम ने ए'तिबार कर लिया
ज़रा सी देर ज़िन्दगी को ख़ुश-गवार कर लिया
Mahshar Inayati
#4
वही मंज़िलें वही दश्त ओ दर तिरे दिल-ज़दों के हैं राहबर
वही आरज़ू वही जुस्तुजू वही राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ
Noon Meem Rashid
#5
मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बस
ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं
Jaun Elia
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