Urdu and Hindi Poetry: Sher, Ghazal, Nazm | Poetistic
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
सैड
sad

तूफ़ानों से आँख मिलाओ सैलाबों पे वार करो मल्लाहों का चक्कर छोड़ो तैर के दरिया पार करो
मोटिवेशनल
motivational

उस के चेहरे की चमक के सामने सादा लगा आसमाँ पे चाँद पूरा था मगर आधा लगा
रोमांटिक
romantic

बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा
लव
love

ज़ेहन से यादों के लश्कर जा चुके वो मेरी महफ़िल से उठ कर जा चुके
ज़िंदगी
life
निगाह-ए-गर्म क्रिसमस में भी रही हम पर हमारे हक़ में दिसम्बर भी माह-ए-जून हुआ
फेस्टिव
festive
























