Ghazal Collection

ये ग़म क्या दिल की आदत है? नहीं तो
किसी से कुछ शिकायत है? नहीं तो

है वो इक ख़्वाब-ए-बे ताबीर इसको
भुला देने की नीयत है? नहीं तो

किसी के बिन किसी की याद के बिन
जिए जाने की हिम्मत है? नहीं तो

किसी सूरत भी दिल लगता नहीं? हाँ
तो कुछ दिन से ये हालत है? नहीं तो

तुझे जिसने कहीं का भी नहीं रक्खा
वो इक ज़ाती सी वहशत है? नहीं तो

तेरे इस हाल पर है सब को हैरत
तुझे भी इस पे हैरत है? नहीं तो

हम-आहंगी नहीं दुनिया से तेरी
तुझे इस पर नदामत है? नहीं तो

वो दरवेशी जो तज कर आ गया तू
ये दौलत उस की क़ीमत है? नहीं तो

हुआ जो कुछ यही मक़सूम था क्या?
यही सारी हिकायत है? नहीं तो

अज़ीयत-नाक उम्मीदों से तुझको
अमाँ पाने की हसरत है? नहीं तो

तू रहता है ख़याल-ओ-ख़्वाब में गुम
तो इसकी वजह फ़ुर्सत है? नहीं तो

वहाँ वालों से है इतनी मोहब्बत
यहाँ वालों से नफ़रत है? नहीं तो

सबब जो इस जुदाई का बना है
वो मुझसे ख़ूबसूरत है? नहीं तो
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Jaun Elia
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ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फ़त नई नई है
अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में, अभी मोहब्बत नई नई है

अभी न आएँगी नींद तुमको, अभी न हमको सुकूँ मिलेगा
अभी तो धड़केगा दिल ज़ियादा, अभी मुहब्बत नई नई है

बहार का आज पहला दिन है, चलो चमन में टहल के आएँ
फ़ज़ा में ख़ुशबू नई नई है गुलों में रंगत नई नई है

जो खानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना
तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है

ज़रा सा क़ुदरत ने क्या नवाज़ा के आके बैठे हो पहली सफ़ में
अभी क्यों उड़ने लगे हवा में अभी तो शोहरत नई नई है

बमों की बरसात हो रही है, पुराने जांबाज़ सो रहे हैं
ग़ुलाम दुनिया को कर रहा है वो जिसकी ताक़त नई नई है
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Shabeena Adeeb
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