Anand Raj Singh

Anand Raj Singh

@anand-raj-singh

Anand Raj Singh shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Anand Raj Singh's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Shayari
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Sher

मोहब्बत तो तुम्हें करनी नहीं थी मेरे अंदर का बच्चा मारना था — Anand Raj Singh
वहम मुझ को ये भाता है अभी मेरी दीवानी है मगर मेरी दीवानी थी मियाँ पहले बहुत पहले — Anand Raj Singh
हम ने अब तक गाल बचा के रक्खे हैं क्या तुम ने भी गुलाल बचा के रक्खे हैं — Anand Raj Singh
रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले बहुत पहले — Anand Raj Singh
हिज्र में तुम ने केवल बाल बिगाड़े हैं हम ने जाने कितने साल बिगाड़े हैं — Anand Raj Singh

Ghazal

Nazm

"तसल्ली" तसल्ली अब भी ज़िन्दा है मगर अफ़्सोस इतना है न खुल बात करती है न ज़्यादा साँस लेती है फ़क़त दीमक-ज़दा वीरान कमरे और तन्हा तीरगी में सर झुकाए साँस लेती है किसी ख़ुश-बास मौसम में ख़मोशी तोड़ती है बोलती है गुनगुनाती है ओ मेरे यार ग़म मत कर वो इक दिन लौट आएगी तुझे अपना बनाएगी बिताए चार सालों में नए मौसम नहीं देखे नई ख़्वाहिश नहीं उट्ठी नया कब साल आता है ये सारे ही पुराने हैं वही दीमक-ज़दा वीरान कमरा वही आग़ोश में बैठी उदासी तसल्ली के तमाशे ने तमाशा कर दिया मुझ को तसल्ली के तमाशे मुझ सेे अब देखे नहीं जाते अमाँ ये जानलेवा है तसल्ली तेरे वादे की बेवा है तसल्ली — Anand Raj Singh
"अगर तुम न होती" अगर तुम न होती वबा के दिनों में तो मुझे कौन कहता है कि काढ़ा बना लो सुनो कुछ दिनों को मेरी बात मानो और ठंडी चीज़ों से ख़ुद को बचा लो बर्फ़ का ठंडा पानी जो मुँह से लगाता बताओ मुझे कौन नख़रे दिखाता भला कौन कहता है मुझे तुम सेे कोई बात करनी नहीं है जो मर्ज़ी में आए करो तुम मरो तुम मुझे मार डालो करो ख़ूब मन की अगर तुम न होती तो मैं किस से कहता सुनो तुम सुनो ना मेरी जान सुन लो न रूठो तुम मुझ सेे चलो मान जाओ हमारे लिए ही तो बाग़-ए-बहिश्त से आदम और हव्वा निकाले गए हैं कभी हम मिलेंगे कभी हम बनेंगे हम इक दूजे के हाथों में हाथों को देकर इक मंज़िल चुनेंगे, उसी पर चलेंगे अगर तुम न होती तो मैं किस से कहता हूँ तुम्हारी ये गहरी अंटलाटिक सी आँखों में कई टाइटैनिक दफ़न हो रहे हैं सँभालो इन्हें तुम बचा लो इन्हें तुम मुझे डूबने दो, मैं एंटिक बनूँगा अगर तुम न होती तो नज़्में ये ग़ज़लें किसे मैं सुनाता भला कौन कहता सताओ ना मुझ को रुलाओ ना मुझ को मेरी वहशतों से बचा लो ना मुझ को सुनो ना गले से लगा लो मुझ को — Anand Raj Singh