"तैयब"
वो अक्सर मुझ से कहती थी
सुनो जब हम बड़े होंगे
हम अपना घर बसाएँगे
तो अपने बेटे को हम प्यार से तैयब बुलाएँगे
अभी कुछ दिन ही बीते थे कि तैयब आ गया इक दिन
ये तैयब वो नहीं था जो मेरे ख़्वाबों का हिस्सा था
ये तैयब वो था जो उस की यादों में रहता था
नहीं समझे हो जो अब भी सुनो तुम को मैं समझाऊँ
मैं अपनी पहली मोहब्बत का दूजा इश्क़ था प्यारे
सुना है अब वो कहती है सुनो तैयब सुनो तैयब
कहो तो अपने बेटे को आनंद पुकारें अब
— Anand Raj Singh















