'June' Sahab Barelvi

'June' Sahab Barelvi

@junesahab

'Joon' Sahab shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in 'Joon' Sahab's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

क्या हसीनों को ही मयस्सर है कोई देता नहीं गुलाब मुझे — 'June' Sahab Barelvi
तिरे हिज्र के अश्क गोया समुंदर यहीं डूब जाने को जी चाहता है — 'June' Sahab Barelvi
मेरे सवाल का भी मिलता जवाब लेकिन वो भी खड़े थे लब पे हर्फ़-ए-सवाल बाँधे — 'June' Sahab Barelvi
इश्क़ करना है तो पहले सब्र कर इश्क़ पहले तो नकारा जाएगा — 'June' Sahab Barelvi
सर्द मौसम में वो क़रीब आए दिल का मौसम है सर्द बरसों से — 'June' Sahab Barelvi
जिस ने तोड़ा था हमारे दिल को कर दिया उस के हवाले दिल को — 'June' Sahab Barelvi
कोई तो ग़म तुम्हें भी है वर्ना बे-वजह यूँँ न मुस्कुराती तुम — 'June' Sahab Barelvi
ख़ुदा के फ़ज़्ल से महरूम हूँ मैं लगाना फिर कभी बोहतान कोई — 'June' Sahab Barelvi
फिर नमक-दाँ में रख दिया मरहम यूँँ सलामत है दर्द बरसों से — 'June' Sahab Barelvi
सारी बातें अपनी जगह हैं लेकिन मैं इक बात कहूँ तुम आँखों से ओझल होते ही ख़्वाबों में आ जाती हो — 'June' Sahab Barelvi
ये रिवायत तिरा पयाम है क्या दूर से ही दुआ सलाम है क्या — 'June' Sahab Barelvi
वो सब मिरे रक़ीब हैं जो हैं तिरे क़रीब कैसे वफ़ा करूँँ मैं बता मेरे हम-नफ़स — 'June' Sahab Barelvi
लगी है मुख़्तसर तख़्ती दर-ओ-दीवार पर घर के लिखूँ अब क्या भला उस में मिरी लंबी कहानी है — 'June' Sahab Barelvi
इज़्ज़त-ए-नफ़्स है ग़नीमत है क्यूँँ गुज़रना है उस की गलियों से — 'June' Sahab Barelvi
बद-दुआ जाने किस की लगी है मुझे तुम दुआ-गो रहो कुछ तो आराम हो — 'June' Sahab Barelvi
फिर इक जगह पे उस से मिरा राब्ता हुआ फिर लौट कर न गुज़रा कभी याँ वहाँ से मैं — 'June' Sahab Barelvi
जो पहली दफ़्अ में मिल जाता सब को न होता इश्क़ से हलकान कोई — 'June' Sahab Barelvi
वो नुजूमी इस्तिशारा और मैं मुझ को मेरे मशवरे अच्छे लगे — 'June' Sahab Barelvi
पहले पहले तो ख़्वाब अच्छे लगे अब डराते हैं मेरे ख़्वाब मुझे — 'June' Sahab Barelvi
अब मुहब्बत का असर मुझ पर हुआ आबले सब पाँव के अच्छे लगे — 'June' Sahab Barelvi

Ghazal

अब नहीं तुझ से मुहब्बत अब दिखावा क्यूँँ करूँँ लोग करते हैं तमाशा मैं तमाशा क्यूँँ करूँँ मैं ही क्यूँँ हर बार बोलूँ प्यार तो तुझ को भी है तुझ को मिलना है तो आजा मैं तक़ाज़ा क्यूँँ करूँँ देखना ही प्यार है तो ये सितम मुझ पे ही क्यूँँ तू भी छुप कर देख मुझ को मैं ही देखा क्यूँँ करूँँ देखता हूँ आज-कल लोगों को मैं रोते हुए मुस्तक़िल दिल में तिरे फिर मैं ठिकाना क्यूँँ करूँँ कहती है वो 'जौन' जैसे दिखते हो बालों से तुम क्यूँँ न बिखरे रहने दूँ फिर इन को बाँधा क्यूँँ करूँँ दिल में जो लड़की नहीं है उस से शादी है मिरी फिर तो सौदा वस्ल का है फिर ये सौदा क्यूँँ करूँँ वो मिरे दिल में बसी है और तू बस रू-ब-रू उस से रिश्ता तोड़ कर मैं तुझ से रिश्ता क्यूँँ करूँँ — 'June' Sahab Barelvi
उफ़ ये अदाएँ उफ़ ये नख़रे तुम तो क़यामत ढाती हो लेकिन ये बतलाओ जानाँ अब किस को बहलाती हो गर ये इजाज़त मुझ को हो तो मैं एक और सवाल करूँँ रात गए तुम अपने घर अब तो जल्दी आ जाती हो तुम तो मुझ पर शक़ करते हो ख़ाला का फोन आया था झूटा-सच्चा ही कुछ कह कर उस को भी समझाती हो तीर चलाए थे जो तुम ने अपनी अदाओं के मुझ पर तीर-अंदाज़ी और ये कर्तब उस को भी दिखलाती हो उस ने तो बस जिस्म लिया है दिल तो अब भी तुम्हारा है इन बातों से दिल दुखता है ये सब क्यूँँ दोहराती हो सारी बातें अपनी जगह हैं लेकिन मैं इक बात कहूँ आँखें मेरी भर आती हैं जब जब तुम याद आती हो अब तक बस ये बात न बदली मेरी जान-ए-जाँ तुम में जब भी 'जून' का नाम लबों पर लाती हो शरमाती हो — 'June' Sahab Barelvi

Nazm