ab nahin tujh se muhabbat ab dikhaava kyun karoon | अब नहीं तुझ से मुहब्बत अब दिखावा क्यूँँ करूँँ

  - 'June' Sahab Barelvi

अब नहीं तुझ से मुहब्बत अब दिखावा क्यूँँ करूँँ
लोग करते हैं तमाशा मैं तमाशा क्यूँँ करूँँ

मैं ही क्यूँँ हर बार बोलूँ प्यार तो तुझ को भी है
तुझ को मिलना है तो आजा मैं तक़ाज़ा क्यूँँ करूँँ

देखना ही प्यार है तो ये सितम मुझ पे ही क्यूँँ
तू भी छुप कर देख मुझ को मैं ही देखा क्यूँँ करूँँ

देखता हूँ आज-कल लोगों को मैं रोते हुए
मुस्तक़िल दिल में तिरे फिर मैं ठिकाना क्यूँँ करूँँ

कहती है वो 'जौन' जैसे दिखते हो बालों से तुम
क्यूँँ न बिखरे रहने दूँ फिर इन को बाँधा क्यूँँ करूँँ

दिल में जो लड़की नहीं है उस से शादी है मिरी
फिर तो सौदा वस्ल का है फिर ये सौदा क्यूँँ करूँँ

वो मिरे दिल में बसी है और तू बस रू-ब-रू
उस से रिश्ता तोड़ कर मैं तुझ से रिश्ता क्यूँँ करूँँ

  - 'June' Sahab Barelvi

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