tire saath din jo guzaare the mujhe un dinon ka malaal hai | तिरे साथ दिन जो गुज़ारे थे मुझे उन दिनों का मलाल है

  - 'June' Sahab Barelvi

तिरे साथ दिन जो गुज़ारे थे मुझे उन दिनों का मलाल है
कभी पूछ लेना मिलूँ मैं जब तिरे दिल में जो भी सवाल है

मिरे दोस्तों मिरी मान लो कभी औरतों को भी जान लो
ये न हों तो जीना मुहाल है ये हों भी तो जीना मुहाल है

कभी लब को चूम के भूलते कभी फाँसियों पे जा झूलते
ये जो बच गए हो दुआऍं दो मिरी शाइरी का कमाल है

मिरे मौला मुझको अता करें जो भी कुछ लिखा है नसीब में
मुझे चाहिए न हराम कुछ मुझे दे दो जो भी हलाल है

अभी कुछ दिनों की तो बात है तिरे साथ शा
में बिताई थीं
मिरे कमरे में तिरे बाद अब तिरे 'इश्क़ का ही जमाल है

  - 'June' Sahab Barelvi

Ibaadat Shayari

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