uf ye adaayein uf ye nakhre tum to qayamat dhaati ho | उफ़ ये अदाएँ उफ़ ये नख़रे तुम तो क़यामत ढाती हो

  - 'June' Sahab Barelvi

उफ़ ये अदाएँ उफ़ ये नख़रे तुम तो क़यामत ढाती हो
लेकिन ये बतलाओ जानाँ अब किस को बहलाती हो

अगर इजाज़त मुझ को हो तो मैं एक आध सवाल करूँॅं
रात गए तुम अपने घर अब तो जल्दी आ जाती हो

ये तो बताओ जान-ए-जानाँ बा'द-ए-वस्ल-ए-विसाल के तुम
उस की भी पेशानी पर बोसा रख कर सो जाती हो

उस ने तो बस जिस्म लिया है दिल तो अब भी तुम्हारा है
इन बातों से दिल दुखता है ये सब क्यूँँॅं दोहराती हो

तुम तो मुझ पर शक़ करते हो ख़ाला का फोन आया था
ऐसा वैसा ही कुछ कह कर उस को भी समझाती हो

तीर चलाए थे जो तुमने अपनी अदाओं से मुझ पर
ऐसे करतब तीर-ओ-तरकश उस को भी दिखलाती हो

सारी बातें अपनी जगह हैं लेकिन मैं इक बात कहूॅं
चैन नहीं है तुम को भी क्यूँँॅं ख़्वाबों में आ जाती हो

  - 'June' Sahab Barelvi

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