Amaan Haider

Amaan Haider

@whoamaanhaider

'Amaan Haider' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in 'Amaan Haider''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

22

Content

53

Likes

264

Shayari
Audios
  • Sher
  • Ghazal

Sher

दुश्वार हुआ जाता है बन-वास में जीना जल्दी से मुझे राम-कहानी से निकालो — Amaan Haider
ऐ परिंदों आनकर बैठो सर-ए-शाख़-ए-अज़ा हम दरख़्तों को शऊर-ए-मर्सिया ख़्वानी भी है — Amaan Haider
हर नफ़स आती है इक मानूस सी ख़ुशबू मुझे क्या मेरे अतराफ़ में तेरी हवा है करबला — Amaan Haider
इश्क़ करना है टूट कर लेकिन अपना हुलिया नहीं बिगाड़ना है — Amaan Haider
इस सेे पहले मैं इन्हें तैश में ठोकर मारूँ मेरे कमरे से उठा लीजिए यादें अपनी — Amaan Haider
इख़्तियार इस लिए दोनों ने ख़मोशी करली गुफ़्तगू नफ़्स की तौहीन तलक आ गई थी — Amaan Haider
आप वो ख़्वाब जिन्हें आँखें मुयस्सर हैं बहुत हम वो आँखें कि जिन्हें ख़्वाब मुयस्सर ही नहीं — Amaan Haider
तुम्हारी याद में ज़ख़्मों को छील लेते हैं हमें तरस ही नहीं आता अपनी हालत पर — Amaan Haider
मैं सात साल से अब तक हिसार-ए-इश्क़ में हूँ वो शख़्स आज भी मेरे दिल-ओ-दिमाग़ में है — Amaan Haider
हमारे सीने में दिल कब है दुख धड़कता है रगों में ख़ून नहीं है उदासी बहती है — Amaan Haider
लंबी नहीं चलेगी मेरी ज़िन्दगी की फ़िल्म थक जाऊँगा निभाके मैं किरदार अनक़रीब — Amaan Haider
शिकवा करने वाले और कितनी तवज्जोह दूँ तुझे मैं तेरी चुप सुन रहा हूँ इतनी आवाज़ों के बीच — Amaan Haider
साथ मज़लूम के हैं दीन के हामी हम हैं मुख़्तसर ये है फ़िलिस्तीन के हामी हम हैं — Amaan Haider
एक तो मुझ को ज़माने ने बिगाड़ा कुछ कुछ और इक उम्र ने मासूम नहीं रहने दिया — Amaan Haider
दो चार दिन के बा'द ये होगा तुम्हें मलाल इक ही हसीन शख़्स था वो भी गँवा दिया — Amaan Haider
दश्त कर लूँगा तेरे हिज्र में रोते-रोते अपनी आँखों को मैं दरिया नहीं रहने दूँगा — Amaan Haider
और छह शक्लें तो मिल जाएँगी मेरे जैसी पर मेरे दिल की तरह दिल नहीं मिलने वाला — Amaan Haider
हासिल नहीं हुआ है मोहब्बत में कुछ मगर इतना तो है कि ख़ाक उड़ाना तो आ गया — Amaan Haider
मेरी तन्हाई की ग़िज़ा मत पूछ ख़ून पीती है जान खाती है — Amaan Haider

Ghazal

इस सेे पहले कि बिछड़ने का इरादा कर लें आओ हम ज़िक्र मुहब्बत का ज़्यादा कर लें बिन पिए भी तो शब-ए-हिज्र गुज़र सकती है क्या ज़रूरी है कि सर तोहमत-ए-बादा कर लें ये भी हो सकता है वो ख़ुद में सिमटकर आएँ हम भी मुमकिन है कि आग़ोश कुशादा कर लें हम को मलबूस-ए-सुकूनत तो नहीं होगा नसीब रास्ते की ही थकन तन का लिबादा कर लें दश्त-ए-वहशत में भी मुमकिन है कि नींद आ जाए गर्द को शाल जो पत्थर को विसादा कर लें हम फ़क़ीरों को जहाँ वालों ने समझा क्या है बादशाहों को भी चाहें तो पियादा कर लें मुझ को उस हाथ पे दिल रखना था मैं रख आया अब वो चाहें तो मेरे दिल का बुरादा कर लें — Amaan Haider
शब-ए-फ़िराक़ में आहों को नींद आ रही है अजीब है कि तबाहों को नींद आ रही है मिरी हयात का अब रतजगा नहीं मुमकिन कि इक समय से निगाहों को नींद आ रही है सुना रहा हूँ इन्हें लोरियाँ मैं तौबा की इसीलिए तो गुनाहों को नींद आ रही है ये कहके टाल दिए हैं मुक़दमे मुंसिफ़ ने अदालतों में गवाहों को नींद आ रही है फ़क़ीर ख़ाक पा सोते हैं इत्मीनान के साथ कहाँ ये देख के शाहों को नींद आ रही है तमाम उम्र न मंज़िल को इज़्तिराब रहे हमारे क़दमों में राहों को नींद आ रही है गिरे ही जाती हैं देखो हमारे काँधों पर 'अमान' आप की बाहों को नींद आ रही है — Amaan Haider
अहल-ए-दुनिया के लिए दर्स बनाया गया मैं इश्क़ कर बैठा था, सूली पे चढ़ाया गया मैं कहके दीवाना मुझे लोगों ने मारे पत्थर इश्क़ में क़ैस तेरे जैसा सताया गया मैं एक भी मर्तबा खिड़की से नहीं झाँका वो मुद्दतों कूचा-ए-महबूब में आया गया मैं पाँव में छाले हैं और छालों में काँटे पैवस्त इस क़दर दश्त-ए-अज़िय्यत में फिराया गया मैं ज़िन्दगी थी तो सभी ने नज़र अंदाज़ किया मौत के बा'द कलेजे से लगाया गया मैं ये मेरा ख़्वाब न हो जाए हक़ीक़त, डर है ठोकरें खाता हुआ दश्त में पाया गया मैं रूठता नइँ था मगर रूठा तो ऐसा रूठा मिन्नतें की गईं लेकिन न मनाया गया मैं मैं ने आना तो न था शहर-ए-मोहब्बत में 'अमान' क्या करूँँ यार अगर खींच के लाया गया मैं — Amaan Haider
पहले सफ़ेद शय में समोया गया मुझे फिर उस के बा'द ख़ाक में बोया गया मुझे रक्खा है नाम क़त्ल का क़ातिल ने ख़ुद-कुशी डूबा नहीं हूँ दोस्त डुबोया गया मुझे या'नी मैं था जला हुआ दामन यतीम का अश्कों से मुस्तक़िल यूँँ भिगोया गया मुझे दुनिया को जानना था हुआ कौन सुर्ख़रु नोके सिनाँ में यूँँ भी पिरोया गया मुझे ज़िन्दा था तो किसी ने सहारा नहीं दिया और बाद-ए-मौत काँधों पे ढोया गया मुझे ता-उम्र आप करते रहे मेरी जुस्तुजू अब पा लिया गया था तो खोया गया मुझे मैं था 'अमान' वक़्त की मानिंद और मैं जब हाथ से निकल गया रोया गया मुझे — Amaan Haider
पहलू में मेरे आन के बैठा करे कोई काँधे पे मेरे सर कभी रक्खा करे कोई मुझ को जलाने लग गई तन्हाईयों की धूप जल्दी से आए आन के साया करे कोई मैं जानता हूँ दर्द-ए-जुदाई है कैसी शय शाख़ों से कोई फूल न तोड़ा करे कोई आख़िर मैं क़ैद-ए-जिस्म में कब तक पड़ा रहूँ कुछ पूछता हूँ मैं तो बताया करे कोई मोती की तरह ख़ाक पे बिखरा पड़ा हूँ मैं दामन में अपने मुझ को इकट्टा करे कोई कब तक निगाह-ए-बुग्ज़-ओ-हसद से मैं खाऊँ ज़ख़्म मेरी भी सिम्त प्यार से देखा करे कोई आख़िर मिरे वजूद से किस को पड़ा है फ़र्क मिटने पे मेरे किसलिए नौहा करे कोई कुछ पूछता हूँ ज़िन्दगी तुझ सेे जवाब दे कब तक तेरे इशारों पे नाचा करे कोई पीने के वास्ते जो शराब-ए-सुखन न हो कैसे शब-ए-फ़िराक़ गुज़ारा करे कोई मुश्किल हो जितनी उतना ही मिलता है हौसला रस्ता हमारा शौक़ से रोका करे कोई कहती हैं चीख़-चीख़ के तन्हाईयाँ अमान बाहों में अपनी हम को समेटा करे कोई — Amaan Haider
ये डर सताएगा ता-उम्र मेरी जान मुझे तिरे ख़याल न करदें लहू-लुहान मुझे तमाम उम्र मैं करता रहा सफ़र पे सफ़र अज़ीज़ लगने लगी इस क़दर थकान मुझे फ़क़त उदास नहीं हूँ मैं ख़ुद उदासी हूँ न कर सकेगा कोई शख़्स शादमान मुझे ऐ दोस्त जुर्म-ए-मोहब्बत की मत अज़ीयत पूछ मिरे ख़िलाफ़ ही देना पड़ा बयान मुझे लहू पिलाना है ख़ंजर को तशनालब रह कर सुलगते दश्त में देना है इम्तिहान मुझे मुझे ख़मोश ही रखना था ता-हयात अगर ख़ुदारा किसलिए फिर दी गई ज़बान मुझे मैं इक कटोरे में पानी को भरके बैठ गया ज़मीं पे लाना हुआ जब भी आसमान मुझे हुनर दिखाना है अपना सुख़न के मक़्तल में ग़ज़ल में ढालना है दर्द-ए-दिल 'अमान' मुझे — Amaan Haider
मुझे तक़्सीम टुकड़ों में जो करना है तो बिस्मिल्लाह मिरे लाशे के ऊपर से गुज़रना है तो बिस्मिल्लाह मिरा दिल मिस्ल-ए-सहरा है, यहाँ काँटे हैं पत्थर हैं अगर फिर भी तुम्हें इस में उतरना है तो बिस्मिल्लाह बहुत इल्ज़ाम हैं मुझ पर किसी अहसान की मानिंद तुम्हें भी गर कोई अहसान करना है तो बिस्मिल्लाह उठाना बोझ लोगों का अज़ल से काम है मेरा तुम्हें भी बोझ अपना मुझ पा धरना है तो बिस्मिल्लाह तुम्हें तक़लीफ़ होगी गर मुझे हासिल हुई राहत नमक तुम को मिरे ज़ख़्मों में भरना है तो बिस्मिल्लाह हर इक वा'दा गिना सकता हूँ उँगली पर तुम्हारा मैं मगर वादों से अब तुम को मुकरना है तो बिस्मिल्लाह मुक़फ़्फ़ल खिड़कियाँ हैं, और पंखा भी है रस्सी भी 'अमान' आओ तुम्हें ऐसे ही मरना है तो बिस्मिल्लाह — Amaan Haider