Gussa Shayari - Poetic Verses Reflecting Anger and Frustration

Explore a collection of Gussa Shayari that beautifully captures the raw emotions of anger, frustration, and disappointment. These poetic lines reflect the intensity of gussa (anger) in relationships and life’s challenges.

Best Gussa Shayari on Anger and Frustration

तुम मुहब्बत से नहीं मुझसे ख़फ़ा हो शायद
तुम अगर चाहो तो पिंजरा भी बदल सकते हो

मुन्तज़िर हूँ मैं सो नंबर भी नहीं बदलूँगा
और तुम शहर का नक्शा भी बदल सकते हो
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Vikram Sharma
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चेहरा धुँदला सा था और सुनहरे झुमके थे
बादल ने कानों में चाँद के टुकड़े पहने थे

इक दूजे को खोने से हम इतना डरते थे
ग़ुस्सा भी होते तो बातें करते रहते थे
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Vikram Gaur Vairagi
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मैं एक किरदार से बड़ा तंग हूँ क़लमकार
मुझे कहानी में डाल ग़ुस्सा निकालना है
Umair Najmi
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कभी वो दिन निकल आए कभी वो रात हो जाए
कभी ऐसा नहीं होता कि उनसे बात हो जाए

कभी सोचा नहीं था ये कि तुम हमसे खफ़ा होगे
कभी होगी लड़ाई जो हमारी मात हो जाए
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Afzal Sultanpuri
वो जो इल्ज़ाम हम पर ही लगा के फिर ख़फ़ा हैं अब
हमें कह बद-चलन ख़ुद ही हुए वो बेवफ़ा हैं अब
Shivam Mishra

Heart Touching Gussa Shayari in Hindi

दो दफ़ा ग़ुस्सा हुए वो एक ग़लती पर मेरी
रात की रोटी सवेरे काम में लाई गई
Tanoj Dadhich
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न कोई गिला है, न तुम से ख़फ़ा है
ग़मे-दिल की अब के न कोई दवा है
Sukeshini Budhawne
जो रहे थे खफ़ा-खफ़ा हमसे
कह गए हमको बेवफ़ा हमसे

राह तकते रहे थे फिर भी वो
नईं मिले आख़िरी दफ़ा हमसे
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Shivam Mishra
वो मुझ से भी खफ़ा है, होने दो
यह तो दुनिया की बीमारी है
Meem Alif Shaz
छुड़ा ले हाथ तू ही ज़िन्दगी हम से
नहीं ये हो सकेगी ख़ुदकुशी हम से

तुम्हारे बाद हर शब जाग कर गुज़री
जुदा होकर ख़फ़ा है नींद भी हम से
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Shivam Prajapati

Emotional Gussa Shayari on Pain and Betrayal

मेरा ग़ुस्सा है मेरी शाइरी में
तरन्नुम में कहाँ अच्छा लगेगा
Tanoj Dadhich
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ग़ुस्से में भींच लेता है बाँहों में अपनी वो
क्या सोचना है फिर उसे ग़ुस्सा दिलाइए
Pooja Bhatia
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ख़फ़ा हैं फिर भी आ कर छेड़ जाते हैं तसव्वुर में
हमारे हाल पर कुछ मेहरबानी अब भी होती है
Akhtar Shirani
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बातें करते करते सोने लगते हो
तुम बिल्कुल बच्चों से होने लगते हो

इतना ग़ुस्सा क्यों करते हो मेरी जाँ
तुम ग़ुस्से में ख़ुद ही रोने लगते हो
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Vishal Rana
सिलसिला ये है कि अब वो भी ख़फ़ा रहने लगा
ख़्वाब रूठा मेरी आँखों से जुदा रहने लगा

मेरे एहसास की चाँदी की चमक मद्धम है
जब से आपे में मुहब्बत का ख़ुदा रहने लगा
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Moni Gopal Tapish

Beautiful Gussa Shayari in Urdu

अभी से मेरे रफ़ूगर के हाथ थकने लगे
अभी तो चाक मिरे ज़ख़्म के सिले भी नहीं

ख़फ़ा अगरचे हमेशा हुए मगर अब के
वो बरहमी है कि हम से उन्हें गिले भी नहीं
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Parveen Shakir
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निभेगी किस तरह दिल सोचता है
अजब लड़की है जब देखो ख़फ़ा है
Fuzail Jafri
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या वो थे ख़फ़ा हम से या हम हैं ख़फ़ा उन से
कल उन का ज़माना था आज अपना ज़माना है
Jigar Moradabadi
ग़ुस्सा माँ का इक बच्चा जितना सह सकता है
कोई तुमसे भी उतना ग़ुस्सा रह सकता है

आँखें तुम्हारी उकसाती हैं बातें करने को
वरना कौन तुम्हारे आगे क्या कह सकता है
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Sandeep dabral 'sendy'
ये रोज़ रोज़ मनाने से लाख अच्छा है
ख़फ़ा हो हमसे अगर तुम तो फिर ख़फ़ा ही रहो
Toyesh prakash

Short Gussa Shayari for Instagram Captions

फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले था
वो मुझ से इंतिहाई ख़ुश ख़फ़ा होने से पहले था
Anwar Shaoor
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लोग कहते हैं कि तू अब भी ख़फ़ा है मुझ से
तेरी आँखों ने तो कुछ और कहा है मुझ से
Jaan Nisar Akhtar
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मुझको गया था छोड़ के वो कितने तैश में
लेकिन खुशी से रह न सका एक साल भी
Ankit Maurya
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ग़ुस्सा भी आता अच्छी भी लगती है
ये दुनिया हँसती-रोती इक बच्ची है
Dipanshu Shams
किसी से ख़फ़ा मैं हुआ ही नहीं
कभी मुझको ये हक़ मिला ही नहीं
Vaseem 'Haidar'

Poetic Gussa Shayari on Relationships and Conflict

आज भी वो वो ही है और अदा भी वो ही है
बेवफ़ा भी वो ही है और ख़फ़ा भी वो ही है
Aatish Indori
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लोग कहते हैं कि तू अब भी ख़फ़ा है मुझ से
तेरी आँखों ने तो कुछ और कहा है मुझ से
Jaan Nisar Akhtar
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यूँ लगे दोस्त तिरा मुझ से ख़फ़ा हो जाना
जिस तरह फूल से ख़ुशबू का जुदा हो जाना
Qateel Shifai
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तैश में उसने मोहब्ब्त छोड़ दी
होश में वो एक दिन पछताएगा
Alankrat Srivastava
ख़फ़ा है शख़्स अगर तो उसे मना लो तुम
क़ज़ा किसी को कभी बोलकर नहीं आती
Tanya gupta

Gussa Shayari on Life’s Struggles and Disappointment

हवा ख़फ़ा थी मगर इतनी संग-दिल भी न थी
हमीं को शमा जलाने का हौसला न हुआ
Qaisar-ul-Jafri
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देर से आने पर वो ख़फ़ा था आख़िर मान गया
आज मैं अपने बाप से मिलने क़ब्रिस्तान गया
Afzal Khan
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ये जो दुनिया है इसे इतनी इजाज़त कब है
हम पे अपनी ही किसी बात का ग़ुस्सा उतरा
Abhishek shukla
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अब तो आ जाए मिलने मुझसे वो
अब तो मैं ग़ुस्सा भी नहीं करता
Bilal Ameer Ahmad
नहीं होते जुदा ऐसे कभी दो लोग दुनिया में
मियाँ आपस में दोनों का ख़फ़ा होना ज़रूरी है

पुराने जब तलक बनकर रहोगे याद आएगी
ज़माने की तरह तुमको नया होना जरूरी है
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Kush Pandey ' Saarang '

Thoughtful Gussa Shayari on Understanding and Resolution

यार इसमें तो मज़ा है ही नहीं
कोई भी हमसे ख़फ़ा है ही नहीं

इश्क़ ही इश्क़ है महसूस करो
और कुछ इसके सिवा है ही नहीं
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Madhyam Saxena
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मना भी लूँगा गले भी लगाऊँगा मैं 'अली'
अभी तो देख रहा हूँ उसे ख़फ़ा कर के
Ali Zaryoun
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ज़ब्त करता हूँ तो घुटता है क़फ़स में मिरा दम
आह करता हूँ तो सय्याद ख़फ़ा होता है
Qamar Jalalvi
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हमारी नींद आँखों से ख़फ़ा है
वगरना कौन शब में जागता है?
ABhishek Parashar
मुझमें जो गुम है कहीं वो हिस्सा नही देखा मेरा
तुमने प्यार देखा है अभी गुस्सा नही देखा मेरा
karan singh rajput
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Inspirational Gussa Shayari on Patience and Peace

जो गुस्सा आ गया तो क्या ही कर लेंगे
ज़ुबाँ ये मेरी गाली भी नहीं देती
Irshad Siddique "Shibu"
इतना तो बता जाओ ख़फ़ा होने से पहले
वो क्या करें जो तुम से ख़फ़ा हो नहीं सकते
Asad Bhopali
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क्यों चुप है तू कोई सवाल तो कर
मेरे दिल का भी कुछ ख़याल तो कर

थोड़ा ग़ुस्सा, कोई शिकवा, या फिर
यूँ ही चुप रहने का मलाल तो कर
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Meem Alif Shaz
जनाब-ए-क़ल्ब-ए-हज़ीं बे तहाशा तैश के साथ
महाज़-ए-इश्क़ को सर करने घर से निकले हैं
Shajar Abbas
एक ही बात से वो ख़फ़ा हो गई
इसलिए अपनी साँसें सज़ा हो गई

रात भर उस के हाथों पे मेहँदी रचाई
सुबह आई तो हम से जुदा हो गई
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Meem Alif Shaz

Gussa Shayari on Unspoken Feelings and Regret

किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ
Ahmad Faraz
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तुम को आता है प्यार पर ग़ुस्सा
मुझ को ग़ुस्से पे प्यार आता है
Ameer Minai
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नए इस साल में क्या ही नया है
तिरा गुस्सा वही नख़रे वही हैं
Sarvjeet Singh
ख़फ़ा किस लिए हैं बताते नहीं हैं
नज़र से नज़र भी मिलाते नहीं हैं

ख़बर उनकी लाकर मुझे कोई दे दे
गली में मेरी क्यों वो आते नहीं हैं
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Ashok Sagar
मिल चुके हैं ख़ाक में
और वो बेखबर है कबसे

अब निकल चुकी है ’जान’
और ’जान’ खफा है कबसे
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Animesh Choubey