Sarvjeet Singh

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@sarvjeet

Sarvjeet Singh shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Sarvjeet Singh's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm

न बन अनजान इतना आज जल्दी आसमाँ में आ
कि थोड़ा तो तरस कर चाँद मेरा चाँद भूखा है

Sarvjeet Singh

इस खिड़की के बाहर जो दिखता है वो सुंदर तो है
पर ये खिड़की दुख देती है इस खिड़की को बंद करो

Sarvjeet Singh

ग़ज़लें रोज़ बनाया कर
ग़म मत ऐसे ज़ाया कर

Sarvjeet Singh

मन करता है उसका तो दिल की बतलाने लगता है
और कभी फिर मुझसे हफ़्तों-हफ़्तों बात नहीं करता

Sarvjeet Singh

सुंदरता अब इस पर निर्भर करती है क्या
कौन यहाँ पर कपड़े कितने कम पहनेगा

Sarvjeet Singh

उसे इस बात का डर है कहीं कुछ छूट जाएगा
मुझे इस बात का डर है कहीं सब कुछ न मिल जाए

Sarvjeet Singh

करने को तो क्या काम नहीं कर सकता मैं
पर तेरा साथ मिले तो अच्छा लगता है

Sarvjeet Singh

बहुत आसान सा था मैं
मुझे मुश्किल किया तूने

धड़कने को धड़कता था
इसे पर दिल किया तूने

Sarvjeet Singh

तेरे आने की आशा में दिन गिनना
बावन तिरपन चौवन पचपन जारी है

Sarvjeet Singh

कि उससे दूर रहना तो हमें मंज़ूर है लेकिन
कहोगे गर उसे हम भूल जाए ये नहीं होगा

Sarvjeet Singh

अगर चाहा ख़ुदा ने तो दुबारा फिर मिलेंगे हम
वगरना ये ज़माना है हमारा दिल लगाने को

Sarvjeet Singh

वो जो मुझको कुछ पल अपना लगता है
क्यों वो कुछ पल बाद पराया लगता है

वो जो मेरे साथ बहुत सालों से है
वो अब और किसी का साया लगता है

वो बस मुझसे हँस के बातें करता है
और न जाने सबको क्या-क्या लगता है

उसके आगे मेरी क़ीमत ख़ास नहीं
उसको जो हो महँगा सस्ता लगता है

दिल की बातें दिल में रखना ठीक नहीं
कह कर देखो काफ़ी अच्छा लगता है

Sarvjeet Singh

मैं कर नहीं पाया ज़रूरी काम सब
मैं कुछ नहीं करने में काफ़ी व्यस्त था

Sarvjeet Singh

बता ऐ चाँद यार-ए-आश्ना का हाल कैसा है
मुझे मालूम है तुझको तो वो सब कुछ बताता है

Sarvjeet Singh

अब उसके मरने पर यूँ इतना अफ़सोस जताते हो
जब वो ज़िंदा था तब उसका हाल कभी पूछा था क्या?

Sarvjeet Singh

चंद से पैसे कमा कर यूँ न तू ख़ुद को ख़ुदा कर
आदमी है ना तो मुझसे आदमी जैसे मिला कर

Sarvjeet Singh

जिसे कभी पढ़ा नहीं
उसे लिखा है हर दफ़ा

Sarvjeet Singh

इस तरह से फँस गए हैं ज़िन्दगी के खेल में
लग रहा आज़ाद हैं हम हैं मगर इक जेल में

Sarvjeet Singh

ज़माना ख़ुद को बदले या न बदले ये उसी पर है
कही पर तुम किसी की यूँ न अपने आप को बदलो

Sarvjeet Singh

ये शेर जो मैं लिख रहा हूँ कौन पूछेगा इसे
ये शेर जो तुम पढ़ रही हो हर ज़बाँ पर होगा अब

Sarvjeet Singh

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