आज सारे ग़म भुला कर एक लड़की हँस रही है
साथ में सब को हँसा कर एक लड़की हँस रही है
क्या पता फिर कब मिले मौका उसे यूँ देखने का
बोल दो सब को बुला कर एक लड़की हँस रही है
हो गया है एक अरसा ही उसे आए हुए भी
अब न मेरे घर पे आ कर एक लड़की हँस रही है
कुछ पलों के ही लिए पर भूल कर इस ज़िन्दगी को
छत पे आकर खिलखिला कर एक लड़की हँस रही है
आए इक मैसेज को पढ़ने वो दौड़ी सी गई है
कमरे में यूँ छुप-छुपा कर एक लड़की हँस रही है
आख़िरश वो हँस रही है ख़ुश रहूँगा सोच कर ये
चाहे मुझ को ही रुला कर एक लड़की हँस रही है
कभी इसकी क़सम खाओ कभी उसकी क़सम खाओ
नहीं तुम झूठ कहते हो चलो मेरी क़सम खाओ
वफ़ा को मापने का इक अलग उसका है पैमाना
तुम्हें मुझसे मुहब्बत है अगर सच्ची,क़सम खाओ
उसे विश्वास ही होता नहीं चाहे मैं जो कह लूँ
क़सम खाओ अगर बोला है तो जल्दी क़सम खाओ
मुझे मालूम है तुम कल किसी के साथ थे फिर से
अगर ऐसा नहीं है तो मिरे सर की क़सम खाओ
किसी भी झूठ को तुम सच बना सकते नहीं,चाहे
किसी पोथी पे रख के हाथ जो मर्ज़ी क़सम खाओ
ये कलयुग है मिरे प्यारे यहाँ सब कुछ ही चलता है
यहाँ कोई नहीं मरता कि तुम झूटी क़सम खाओ
मैं अच्छा इंसान नहीं हूँ
हाँ लेकिन हैवान नहीं हूँ
बस मतले से बूझ सको तुम
इतना भी आसान नहीं हूँ
जिसको तू भर देगा आके
मैं वो खाली स्थान नहीं हूँ
तू है मेरी जान,भला फिर
मैं क्यों तेरी जान नहीं हूँ
देख ज़रा कितना हँसता हूँ
मैं बिल्कुल परिशान नहीं हूँ
फिर से आ जाऊ बातों में
मैं इतना नादान नहीं हूँ
तुझको भी मैं जान चुका हूँ
ख़ुद से भी अंजान नहीं हूँ
यूँ ऐसे दस्तक ना दे अब
बस तू ऐसा मान नहीं हूँ
मैं अच्छा इंसान नहीं हूँ
हाँ लेकिन हैवान नहीं हूँ
बस मतले से बूझ सको तुम
इतना भी आसान नहीं हूँ
अच्छा तुम इक बात बताओ, सच कहना
किसके सह थे रात बताओ, सच कहना
ना मुझको तुम पे बिल्कुल विश्वास नहीं
सर पे रख के हात बताओ, सच कहना
मेरी हालत जान भला क्या करना है?
तुम अपने हालात बताओ, सच कहना
अब भी मेरी याद तुम्हें आती है क्या?
कुछ दिल के जज़्बात बताओ, सच कहना
अब किसकी यादों के घन आँखों में हैं?
क्यों इतनी बरसात बताओ, सच कहना
मुझसे ज्यादा ध्यान तिरा रखता है वो?
ख़ुश हो उसके साथ बताओ, सच कहना
क्या डरें हम भूत-डायन-सी किसी भी बद-बला से
आदमी से ही नहीं महफ़ूज़ है जब आदमी अब
जिसको गुस्सा लग जाता है छोटी-छोटी बातों का
उससे क्या वादा लेना अब लंबे-लंबे साथों का