
वो जो मुझ को कुछ पल अपना लगता है
क्यूँ वो कुछ पल बा'द पराया लगता है
वो जो मेरे साथ बहुत सालों से है
वो अब और किसी का साया लगता है
वो बस मुझ से हँस के बातें करता है
और न जाने सब को क्या-क्या लगता है
उस के आगे मेरी क़ीमत ख़ास नहीं
उस को जो हो महँगा सस्ता लगता है
दिल की बातें दिल में रखना ठीक नहीं
कह कर देखो काफ़ी अच्छा लगता है
— Sarvjeet Singh















