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    वतन की फ़िक्र कर नादाँ मुसीबत आने वाली है
    तेरी बर्बादियों के मशवरे हैं आसमानों में
    Allama Iqbal
    तमाम दिन के दुखों का हिसाब करना है
    मैं चाहता हूँ कोई मेरे आस-पास न हो
    Tahir Faraz
    अब उदास फिरते हो सर्दियों की शामों में
    इस तरह तो होता है इस तरह के कामों में

    अब तो उस की आँखों के मय-कदे मयस्सर हैं
    फिर सुकून ढूँडोगे साग़रों में जामों में

    दोस्ती का दावा क्या आशिक़ी से क्या मतलब
    मैं तेरे फ़क़ीरों में मैं तेरे ग़ुलामों में

    ज़िंदगी बिखरती है शाएरी निखरती है
    दिलबरों की गलियों में दिल-लगी के कामों में

    जिस तरह 'शोएब' उस का नाम चुन लिया तुम ने
    उस ने भी है चुन रक्खा एक नाम नामों में
    Read Full
    Shoaib Bin Aziz
    मैं बिखर गया तो सँवर गया मेरे मुंसिफ़ो को ये दुख रहा
    वही फ़ैसला मेरे हक़ में था जो मेरे ख़िलाफ़ किया गया
    Shahid Zaki
    ये उदासी का सबब पूछने वाले 'अजमल'
    क्या करेंगे जो उदासी का सबब बतलाया
    Ajmal Siraj

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    दो तरफ़ था हुजूम सदियों का
    एक लम्हा सा दरमियाँ मैं था
    Ejaz Azmi
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    अब आपकी मर्जी है सँभालें न सँभालें
    ख़ुश्बू की तरह आप के रूमाल में हम हैं
    Munawwar Rana
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    सफ़र के ब'अद भी मुझ को सफ़र में रहना है
    नज़र से गिरना भी गोया ख़बर में रहना है
    Aadil Raza Mansoori
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    आग अपने ही लगा सकते हैं
    ग़ैर तो सिर्फ़ हवा देते हैं
    Mohammad Alvi
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    मौसम यही है प्यार का
    सावन अभी आया नहीं
    Krishnakant Kabk
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    उसे ले कर जो गाड़ी जा चुकी है
    मैं शायद उस के नीचे आ रहा हूँ
    Fahmi Badayuni
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    रक़ीबों को कहने की हिम्मत नहीं है
    कि मुझको तुझी से मुहब्बत नहीं है

    बहुत प्यार करता हूँ तू जानता है
    बताने की मुझको ज़रूरत नहीं है

    ख़ुदा से तुझे माँगता हूँ हमेशा
    मेरे प्यार में कोई ज़िल्लत नहीं है

    तू बे-ख़ौफ़ अब प्यार कर मुझसे जानाँ
    मुझे इस ज़माने से वहशत नहीं है

    फ़ना हो गया तेरी उलफ़त में 'दानिश'
    तुझे लगता है ये सदाक़त नहीं है
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    Danish Balliavi
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    हमको आदम भी होना मयस्सर नइँ
    आपको रास आया ख़ुदा होना
    Rakesh Mahadiuree
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    कुछ चीज़ें तन्हा अच्छी हैं
    जैसे चाँद, ख़ुदा और मैं
    Shaad Imran
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    ज़िंदगी से बड़ी सज़ा ही नहीं
    और क्या जुर्म है पता ही नहीं
    Krishna Bihari Noor
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Best from Verified

    सूख जाता जल्द है फिर भी निशानी के लिए
    फूल इक छुप के किताबों में छिपाना इश्क़ है
    Parul Singh "Noor"
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    न जाने हमारा भी क्या ही बनेगा
    बहुत देर से चाक पर घूमते हैं
    Afzal Ali Afzal
    आस लगाए हो जिससे मिलने की तुम
    मेरे दर पर वो रोज़ाना आता है
    Amaan Pathan
    कभी भी ज़िन्दगी में कुछ अगर करना
    ग़रीबी से अमीरी तक सफ़र करना

    यहाँ जो जाम रक्खा है उधर करना
    वहाँ जो चाय रक्खी है इधर करना

    बहन और भाई से लड़कर दिवाली पे
    अभी तक याद है घर को कलर करना

    किसी के शेर जब उसके न रह जाएँ
    इसे कहते हैं शेरों को अमर करना
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    Tanoj Dadhich
    मन में एक इरादा होता है ताबिश
    राजा पहले प्यादा होता है ताबिश

    मानता हूँ मजबूरियाँ थीं कुछ दिक्कत थी
    पर वादा तो वादा होता है ताबिश
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    Vishal Singh Tabish
    74 Likes
    घर में कुछ और इज़ाफ़ा हुआ तामीर के बाद
    एक दीवार बनी थी तेरी तस्वीर के बाद

    ख़्वाब लगता हूँ तो फिर देख मुझे लुत्फ़ उठा
    मैं दिखाई नहीं दूँगा तुझे ताबीर के बाद

    बाद ज़ंजीर के भी मैं न रिहा हो पाया
    पाँव लोहे के हुए थे मेरे ज़ंजीर के बाद

    मेरी तक़दीर ने मुझको ही सिपाही रक्खा
    मैं अकेला ही लड़ा ख़ुद से भी तक़दीर के बाद

    जंग के बाद यहाँ अम्न भी तो आएगा
    हल चलाना भी सिखाना मुझे शमशीर के बाद
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    Navin Joshi
    अलिफ़-वस्ल जैसे मिले थे कभी हम
    अमान अब वो दिल से जुदा कर चुकी है
    Amaan Pathan
    किसी के हाथ से पहनी न शिव ने माला भी
    तुम्हारा रास्ता तकता है वो शिवाला भी

    उसे हुई भी मुहब्बत तो मुझ-से बेदिल से
    शरीफ़ लड़की थी इक साल उसको टाला भी

    मैं इश्क़ कर तो रहा हूँ ये दूसरा लेकिन
    गले में अटका है पहले का इक निवाला भी

    ज़मीनदार का लड़का हूँ ऐ परी-रू मैं
    सभी से गाँव में रोशन दिमाग वाला भी

    तेरी नज़र जो झुकी दीप भी हुए मद्धम
    तेरा मिज़ाज समझता है ये उजाला भी

    तुम्हारे इश्क़ के ग़म निकले जान के दुश्मन
    इन आंधियों में उड़ा रूह का दुशाला भी
    Read Full
    Vishnu virat
    "तराईले-इस चमन की आबरू लुट जायेगी"
    गर यूँ ही लुटती रहेंगी तितलियां
    इस चमन की आबरु लूट जाएगी
    और मिट जाएंगी सारी मस्तियाँ
    गर यूँ ही लुटती रहेंगी तितलियाँ
    सूनी हो जाएँगी सारी क्यारियाँ
    इस गगन की आबरू लूट जाएगी
    गर यूँ ही लुटती रहेंगी तितलियां
    इस चमन की आबरु लूट जाएगी
    Read Full
    Afzal Ali Afzal
    3 Likes
    आईना रख सामने और ये बता
    क्यों नहीं दिखता तुझे मैं आजकल?
    Divy Kamaldhwaj

Listen Shayari

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kisi ko kuchh nahin batla rahe hain
Voice: Alankrat Srivastava
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mere zakhm nahin bharte yaaron
Voice: Shayar Bhushan
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purane gham bhulaane mein ziyaada kuchh nahin lagta
Voice: Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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Kuchh baaten khud tak hee rakhana, baaton ke par hote hain
Voice: Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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bina uske kahi akshar na jaayen ham
Voice: Harsh saxena

Poetistic Choice

    सबको हैराँ कर जाऊँगा
    वक़्त से पहले मर जाऊँगा

    पंछी फ़लक को निकल गए हैं
    और मैं फिर दफ़्तर जाऊँगा

    दरियाओं का दावा कब है
    दो आँखें तो भर जाऊँगा

    अगली बार मैं उससे मिलने
    ख़ुद को भी ले कर जाऊँगा

    ख़ूब हँसूँगा ऊपर ऊपर
    अंदर अंदर डर जाऊँगा

    इक दिन छुट्टी मिल जाएगी
    इक दिन मैं भी घर जाऊँगा

    आपको ज़हमत कुछ नइँ होगी
    मैं चुपचाप बिखर जाऊँगा
    Read Full
    Gourav Kumar
    बोसाँ लबाँ सीं देने कहा कह के फिर गया
    प्याला भरा शराब का अफ़्सोस गिर गया
    Abroo Shah Mubarak
    27 Likes
    इक पल का क़ुर्ब एक बरस का फिर इंतिज़ार
    आई है जनवरी तो दिसम्बर चला गया
    Rukhsaar Nazimabadi
    22 Likes
    कौन था वो जिस ने ये हाल किया है मेरा
    किस को इतनी आसानी से हासिल था मैं
    Shariq Kaifi
    मैं बचपन में खिलौने तोड़ता था
    मिरे अंजाम की वो इब्तिदा थी
    Javed Akhtar
    28 Likes
    दश्त-ओ-सहरा में समुंदर में सफ़र है मेरा
    रंग फैला हुआ ता-हद्द-ए-नज़र है मेरा

    नहीं मालूम, उसे उस की ख़बर है कि नहीं
    वो किसी और का चेहरा है, मगर है मेरा

    तू ने इस बार तो बस मार ही डाला था मुझे
    मैं हूँ ज़िंदा तो मिरी जान हुनर है मेरा

    आज तक अपनी ही तरदीद किए जाता हूँ
    आज तक मेरे ख़द-ओ-ख़ाल में डर है मेरा

    बाग़बाँ ऐसा कि मिट्टी में मिला बैठा हूँ
    शाख़-दर-शाख़ दरख़्तों पे असर है मेरा

    शाएरी, इश्क़, ग़म-ए-रिज़्क़, किताबें, घर-बार
    कई सम्तों में ब-यक-वक़्त गुज़र है मेरा
    Read Full
    Aziz Nabeel
    जोशिश-ए-अश्क से हूँ आठ पहर पानी में
    गरचे होते हैं बहुत ख़ौफ़-ओ-ख़तर पानी में

    ज़ब्त-ए-गिर्या ने जलाया है दरूना सारा
    दिल अचम्भा है कि है सोख़्ता-तर पानी में

    आब-ए-शमशीर-ए-क़यामत है बुरिंदा उस की
    ये गवाराई नहीं पाते हैं हर पानी में

    तब-ए-दरिया जो हो आशुफ़्ता तो फिर तूफ़ाँ है
    आह बालों को परागंदा न कर पानी में

    ग़र्क़ आब-ए-अश्क से हूँ लेक उड़ा जाता हूँ
    जूँ समक गो कि मिरे डूबे हैं पर पानी में

    मर्दुम-ए-दीदा-ए-तर मर्दुम-ए-आबी हैं मगर
    रहते हैं रोज़ ओ शब ओ शाम-ओ-सहर पानी में

    हैअत आँखों की नहीं वो रही रोते रोते
    अब तो गिर्दाब से आते हैं नज़र पानी में

    गिर्या-ए-शब से बहुत आँख डरे है मेरी
    पाँव रुकते ही नहीं बार-ए-दिगर पानी में

    फ़र्त-ए-गिर्या से हुआ 'मीर' तबाह अपना जहाज़
    तख़्ता पारे गए क्या जानूँ किधर पानी में
    Read Full
    Meer Taqi Meer
    मुझ को मिरी शिकस्त की दोहरी सज़ा मिली
    तुझ से बिछड़ के ज़िंदगी दुनिया से जा मिली
    Saqi Faruqi
    मुस्लिम हूँ पर ख़ुद पे क़ाबू रहता है
    मेरे अंदर भी इक हिन्दू रहता है

    कोई जादूगर के बाज़ू काट भी दे
    उस के हाथ में फिर भी जादू रहता है

    रात गए तक बच्चे दौड़ते रहते हैं
    मेरे कमरे में इक जुगनू रहता है

    'मीर' का दिवाना 'ग़ालिब' का शैदाई
    मेरी बस्ती में इक साधू रहता है

    उस के लबों पर इंग्लिश विंग्लिश रहती है
    मेरे होंट पे उर्दू उर्दू रहता है

    अक़्ल हज़ारों भेस बदलती रहती है
    ये दिल मर जाने तक बुद्धू रहता है
    Read Full
    Liaqat Jafri
    क्यूँकर उस बुत से रखूँ जान अज़ीज़
    क्या नहीं है मुझे ईमान अज़ीज़

    दिल से निकला पे न निकला दिल से
    है तिरे तीर का पैकान अज़ीज़

    ताब लाए ही बनेगी 'ग़ालिब'
    वाक़िआ सख़्त है और जान अज़ीज़
    Read Full
    Mirza Ghalib
    मिरी ज़बाँ पे नए ज़ाइक़ों के फल लिख दे
    मिरे ख़ुदा तू मिरे नाम इक ग़ज़ल लिख दे

    मैं चाहता हूँ ये दुनिया वो चाहता है मुझे
    ये मसअला बड़ा नाज़ुक है कोई हल लिख दे

    ये आज जिस का है उस नाम को मुबारक हो
    मिरी जबीं पे मिरे आँसुओं से कल लिख दे

    हवा की तरह मैं बेताब हूँ कि शाख़-ए-गुलाब
    जो रेगज़ारों पे तालाब के कँवल लिख दे

    मैं एक लम्हे में दुनिया समेट सकता हूँ
    तू कब मिलेगा अकेले में एक पल लिख दे
    Read Full
    Bashir Badr
    रौशनी रहती थी दिल में ज़ख़्म जब तक ताज़ा था
    अब जहाँ दीवार है पहले वहाँ दरवाज़ा था

    दर्द की इक मौज हर ख़्वाहिश बहा कर ले गई
    क्या ठहरतीं बस्तियाँ पानी ही बे-अंदाज़ा था

    रात सारी ख़्वाब की गलियों में हम चलते रहे
    खिड़कियाँ रौशन थीं लेकिन बंद हर दरवाज़ा था
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    Ahmad Mushtaq
    यक़ीं मोहकम अमल पैहम मोहब्बत फ़ातेह-ए-आलम
    जिहाद-ए-ज़िंदगानी में हैं ये मर्दों की शमशीरें
    Allama Iqbal
    22 Likes
    कमाल-ए-हुस्न है हुस्न-ए-कमाल से बाहर
    अज़ल का रंग है जैसे मिसाल से बाहर

    तो फिर वो कौन है जो मावरा है हर शय से
    नहीं है कुछ भी यहाँ गर ख़याल से बाहर

    ये काएनात सरापा जवाब है जिस का
    वो इक सवाल है फिर भी सवाल से बाहर

    है याद अहल-ए-वतन यूँ कि रेग-ए-साहिल पर
    गिरी हुई कोई मछली हो जाल से बाहर

    अजीब सिलसिला-ए-रंग है तमन्ना भी
    हद-ए-उरूज से आगे ज़वाल है बाहर

    न उस का अंत है कोई न इस्तिआ'रा है
    ये दास्तान है हिज्र-ओ-विसाल से बाहर

    दुआ बुज़ुर्गों की रखती है ज़ख़्म उल्फ़त को
    किसी इलाज किसी इंदिमाल से बाहर

    बयाँ हो किस तरह वो कैफ़ियत कि है 'अमजद'
    मिरी तलब से फ़रावाँ मजाल से बाहर
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    Amjad Islam Amjad
    गले मिला न कभी चाँद बख़्त ऐसा था
    हरा-भरा बदन अपना दरख़्त ऐसा था

    सितारे सिसकियाँ भरते थे ओस रोती थी
    फ़साना-ए-जिगर-ए-लख़्त-लख़्त ऐसा था

    ज़रा न मोम हुआ प्यार की हरारत से
    चटख़ के टूट गया दिल का सख़्त ऐसा था

    ये और बात कि वो लब थे फूल से नाज़ुक
    कोई न सह सके लहजा करख़्त ऐसा था

    कहाँ की सैर न की तोसन-ए-तख़य्युल पर
    हमें तो ये भी सुलेमाँ के तख़्त ऐसा था

    इधर से गुज़रा था मुल्क-ए-सुख़न का शहज़ादा
    कोई न जान सका साज़-ओ-रख़्त ऐसा था
    Read Full
    Shakeb Jalali
    इस तरह के लब कौन तराशेगा दोबारा
    इस तरह का चेहरा तो किसी का नहीं बनना
    Aamir Sohail
    मिरी सुब्ह का यूँ भी इज़हार हो
    पियाला हो कॉफ़ी का अख़बार हो

    कोई जुर्म साबित न हो उसका फिर
    जो तेरी हँसी में गिरफ़्तार हो
    Read Full
    Swapnil Tiwari
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    शैख़ जी आओ मुसल्ला गिरो जाम करो
    जिंस तक़्वा के तईं सिर्फ़ मय-ए-ख़ाम करो

    फ़र्श मस्ताँ करो सज्जादा-ए-बे-तह के तईं
    मय की ताज़ीम करो शीशे का इकराम करो

    दामन-ए-पाक को आलूदा रखो बादे से
    आप को मुग़्बचों के क़ाबिल-ए-दुश्नाम करो

    नेक-नामी-ओ-तक़ावत को दुआ जल्द कहो
    दीन-ओ-दिल पेश-कश सादा-ए-ख़ुद-काम करो

    नंग-ओ-नामूस से अब गुज़रो जवानों की तरह
    पर फ़िशानी करो और साक़ी से इबराम करो

    ख़ूब अगर जुरआ' मय-नोश नहीं कर सकते
    ख़ातिर-जमअ' मय-आशाम से ये काम करो

    उठ खड़े हो जो झुके गर्दन-ए-मीना-ए-शराब
    ख़िदमत-ए-बादा-गुसाराँ ही सर-अंजाम करो

    मुतरिब आ कर जो करे चंग-नवाज़ी तो तुम
    पैरहन मस्तों की तक़लीद से इनआ'म करो

    ख़ुनकी इतनी भी तो लाज़िम नहीं इस मौसम में
    पास जोश-ए-गुल-ओ-दिल गर्मी-ए-अय्याम करो

    साया-ए-गुल में लब-ए-जू पे गुलाबी रखो
    हाथ में जाम को लो आप को बदनाम करो

    आह-ए-ता-चंद रहो ख़ानकाह-ओ-मस्जिद में
    एक तो सुब्ह-ए-गुलसिताँ में भी शाम करो

    रात तो सारी गई सुनते परेशाँ-गोई
    'मीर'-जी कोई घड़ी तुम भी तो आराम करो
    Read Full
    Meer Taqi Meer
    नदी के पार उजाला दिखाई देता है
    मुझे ये ख़्वाब हमेशा दिखाई देता है

    बरस रही हैं अक़ीदत की बदलियाँ लेकिन
    शुऊर आज प्यासा दिखाई देता है

    चराग़-ए-मंज़िल-ए-फ़र्दा जलाएगा इक रोज़
    वो राहगीर जो तन्हा दिखाई देता है

    तिरी निगाह ने हल्का सा नक़्श छोड़ा था
    मगर ये ज़ख़्म तो गहरा दिखाई देता है

    किसी ख़याल की मिश्अल किसी सदा का चराग़
    हर एक सम्त अंधेरा दिखाई देता है

    'अमीर' पूछ रहा हूँ ग़म-ए-ज़माना से
    हमारे घर में तुझे क्या दिखाई देता है
    Read Full
    Ameer Qazalbash
    क्या कहा इश्क़ जावेदानी है!
    आख़िरी बार मिल रही हो क्या
    Jaun Elia
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