Darpan
Darpan
Ghazal

तुम ने मुझ सेे इश्क़ किया जब करने को नफ़रत भी थी

या'नी मेरे साथ में तुम थी और मेरी किस्मत भी थी

फूलों के खिल जाने पर सब पहली बारिश भूल गए
बेटों के क़ाबिल होने में माँओं की मेहनत भी थी

वक़्त-ए-रुख़सत में हम हँसते थे तो रोना आता था
जितनी भी दूरी थी हम में उतनी ही क़ुर्बत भी थी

वो लड़का जो सौ नंबर में दो नंबर से चूक गया
जिस
में सब कुछ अच्छा था पर सिगरेट की आदत भी थी

कभी कभी तो वीडियो कॉल पे घण्टों तक खो जाते थे
इश्क़ हमें ये याद दिलाता के हम को फुर्रस्त भी थी

दर्पन मैं टेरेस पर बैठा वहशत का मारा भी था
और फिर बादएसबा उस की यादों से लतपत भी थी

दर्पन

— Darpan

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