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Jawani Shayari

Here is a curated collection of Jawani shayari in Hindi. You can download HD images of all the Jawani shayari on this page. These Jawani Shayari images can also be used as Instagram posts and whatsapp statuses. Start reading now and enjoy.

मैं पल-दो-पल का शायर हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है
पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है

मुझ से पहले कितने शायर आए और आ कर चले गए
कुछ आहें भर कर लौट गए, कुछ नग़में गा कर चले गए
वे भी एक पल का क़िस्सा थे, मैं भी एक पल का क़िस्सा हूँ
कल तुम से जुदा हो जाऊंगा गो आज तुम्हारा हिस्सा हूँ

मैं पल-दो-पल का शायर हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है
पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है

कल और आएंगे नग़मों की खिलती कलियाँ चुनने वाले
मुझसे बेहतर कहने वाले, तुमसे बेहतर सुनने वाले
कल कोई मुझ को याद करे, क्यों कोई मुझ को याद करे
मसरुफ़ ज़माना मेरे लिए, क्यों वक़्त अपना बरबाद करे

मैं पल-दो-पल का शायर हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है
पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है

मैं हर इक पल का शायर हूँ हर इक पल मेरी कहानी है
हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है

रिश्तों का रूप बदलता है, बुनियादें खत्म नहीं होतीं
ख़्वाबों और उमँगों की मियादें खत्म नहीं होतीं
इक फूल में तेरा रूप बसा, इक फूल में मेरी जवानी है
इक चेहरा तेरी निशानी है, इक चेहरा मेरी निशानी है

मैं हर इक पल का शायर हूँ हर इक पल मेरी कहानी है
हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है

तुझको मुझको जीवन अम्रित अब इन हाथों से पीना है
इनकी धड़कन में बसना है, इनकी साँसों में जीना है
तू अपनी अदाएं बक्ष इन्हें, मैं अपनी वफ़ाएं देता हूँ
जो अपने लिए सोचीं थी कभी, वो सारी दुआएं देता हूँ

मैं हर इक पल का शायर हूँ हर इक पल मेरी कहानी है
हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है
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Sahir Ludhianvi
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ज़िंदगी दर्द की कहानी है
चश्म-ए-अंजुम में भी तो पानी है

बे-नियाज़ाना सुन लिया ग़म-ए-दिल
मेहरबानी है मेहरबानी है

वो भला मेरी बात क्या माने
उस ने अपनी भी बात मानी है

शोला-ए-दिल है ये कि शोला-साज़
या तिरा शोला-ए-जवानी है

वो कभी रंग वो कभी ख़ुशबू
गाह गुल गाह रात-रानी है

बन के मासूम सब को ताड़ गई
आँख उस की बड़ी सियानी है

आप-बीती कहो कि जग-बीती
हर कहानी मिरी कहानी है

दोनों आलम हैं जिस के ज़ेर-ए-नगीं
दिल उसी ग़म की राजधानी है

हम तो ख़ुश हैं तिरी जफ़ा पर भी
बे-सबब तेरी सरगिरानी है

सर-ब-सर ये फ़राज़-ए-मह्र-ओ-क़मर
तेरी उठती हुई जवानी है

आज भी सुन रहे हैं क़िस्सा-ए-इश्क़
गो कहानी बहुत पुरानी है

ज़ब्त कीजे तो दिल है अँगारा
और अगर रोइए तो पानी है

है ठिकाना ये दर ही उस का भी
दिल भी तेरा ही आस्तानी है

उन से ऐसे में जो न हो जाए
नौ-जवानी है नौ-जवानी है

दिल मिरा और ये ग़म-ए-दुनिया
क्या तिरे ग़म की पासबानी है

गर्दिश-ए-चश्म-ए-साक़ी-ए-दौराँ
दौर-ए-अफ़लाक की भी पानी है

ऐ लब-ए-नाज़ क्या हैं वो असरार
ख़ामुशी जिन की तर्जुमानी है

मय-कदों के भी होश उड़ने लगे
क्या तिरी आँख की जवानी है

ख़ुद-कुशी पर है आज आमादा
अरे दुनिया बड़ी दिवानी है

कोई इज़हार-ए-ना-ख़ुशी भी नहीं
बद-गुमानी सी बद-गुमानी है

मुझ से कहता था कल फ़रिश्ता-ए-इश्क़
ज़िंदगी हिज्र की कहानी है

बहर-ए-हस्ती भी जिस में खो जाए
बूँद में भी वो बे-करानी है

मिल गए ख़ाक में तिरे उश्शाक़
ये भी इक अम्र-ए-आसमानी है

ज़िंदगी इंतिज़ार है तेरा
हम ने इक बात आज जानी है

क्यूँ न हो ग़म से ही क़िमाश उस का
हुस्न तसवीर-ए-शादमानी है

सूनी दुनिया में अब तो मैं हूँ और
मातम-ए-इश्क़-ए-आँ-जहानी है

कुछ न पूछो 'फ़िराक़' अहद-ए-शबाब
रात है नींद है कहानी है
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Firaq Gorakhpuri
दिल अभी तक जवान है प्यारे
किस मुसीबत में जान है प्यारे

तू मिरे हाल का ख़याल न कर
इस में भी एक शान है प्यारे

तल्ख़ कर दी है ज़िंदगी जिस ने
कितनी मीठी ज़बान है प्यारे

वक़्त कम है न छेड़ हिज्र की बात
ये बड़ी दास्तान है प्यारे

जाने क्या कह दिया था रोज़-ए-अज़ल
आज तक इम्तिहान है प्यारे

हम हैं बंदे मगर तिरे बंदे
ये हमारी भी शान है प्यारे

नाम है इस का नासेह-ए-मुश्फ़िक़
ये मिरा मेहरबान है प्यारे

कब किया मैं ने इश्क़ का दावा
तेरा अपना गुमान है प्यारे

मैं तुझे बेवफ़ा नहीं कहता
दुश्मनों का बयान है प्यारे

सारी दुनिया को है ग़लत-फ़हमी
मुझ पे तो मेहरबान है प्यारे

तेरे कूचे में है सुकूँ वर्ना
हर ज़मीं आसमान है प्यारे

ख़ैर फ़रियाद बे-असर ही सही
ज़िंदगी का निशान है प्यारे

शर्म है एहतिराज़ है क्या है
पर्दा सा दरमियान है प्यारे

अर्ज़-ए-मतलब समझ के हो न ख़फ़ा
ये तो इक दास्तान है प्यारे

जंग छिड़ जाए हम अगर कह दें
ये हमारी ज़बान है प्यारे
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Hafeez Jalandhari
न सहरा है न है दरिया हमारा
बहुत बेकार है जीना हमारा

परेशां खुद को हम खुद कर रहें हैं
किसी ने दिल नहीं तोड़ा हमारा

न मयखानों में और ना मस्जिदों मे
कहीं भी दिल नहीं लगता हमारा

जवानी में बुढापा आ गया है
ग़रीबी खा गई चेहरा हमारा

छिपा लेते हम उस दिन भी ये फांका
अगर बच्चा नहीं रोता हमारा

दहाड़े मार कर सब रो पड़े थे
अधूरा रह गया किस्सा हमारा

वो तनख्वाह भेजता है हर महीने
मगर आता नहीं बेटा हमारा

कमाई हक़ की और मेहनत की रोटी
बहुत आसान है रस्ता हमारा

ज़ईफ इक आदमी नंगे बदन था
हमें चुभने लगा कुर्ता हमारा

हमारा सब्र उल्टा चल रहा है
समर होता नहीं मीठा हमारा

अना की ज़िद पे कोई अड़ गया था
तो फीका पड़ गया सोना हमारा

हमारे दिल को उल्फत चाहिये बस
उठा लोगे ना तुम खर्चा हमारा

भरी महफ़िल से उठ कर चल दिया वो
उसे भाया नहीं होना हमारा

भले तुम अब हमारी ज़िन्दगी हो
मगर वो इश्क़ था पहला हमारा

जो चाहे आये दाना पानी ले ले
खुला रहता है अब पिंजरा हमारा

वो अब जो देख कर मुह फेरता है
उसी से था कभी रिश्ता हमारा

मिला कर प्यार ज़ब सींचा जड़ों कों
तो फल देने लगा पौधा हमारा

सुखन में ग़म मिला कर बेचते हैं
अब अच्छा चल रहा धंधा हमारा

तुम्हारे शहर में मशहूर हैं हम
हर इक नें रास्ता रोका हमारा

हमें मंज़िल हमारी मिल गई है
सफर करता है अब जूता हमारा

ये मुमकिन था के वापिस लौट आते
अगर करता कोई पीछा हमारा

ये आँखे अब भी तुमको देखती हैं
मगर दिल हो गया अंधा हमारा

हमारे कत्ल का मंज़र गज़ब था
कलाई उसकी थी नेज़ा हमारा

फ़क़त इक बार ही जलता है दिन में
बड़ा मगरूर है चूल्हा हमारा
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Mohammad Aquib Khan

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