Top 100+

Shahr Shayari

Here is a curated collection of Shahr shayari in Hindi. You can download HD images of all the Shahr shayari on this page. These Shahr Shayari images can also be used as Instagram posts and whatsapp statuses. Start reading now and enjoy.

आप जैसों के लिए इस में रखा कुछ भी नहीं
लेकिन ऐसा तो न कहिए कि वफ़ा कुछ भी नहीं

आप कहिए तो निभाते चले जाएँगे मगर
इस तअ'ल्लुक़ में अज़िय्यत के सिवा कुछ भी नहीं

मैं किसी तरह भी समझौता नहीं कर सकता
या तो सब कुछ ही मुझे चाहिए या कुछ भी नहीं

कैसे जाना है कहाँ जाना है क्यूँ जाना है
हम कि चलते चले जाते हैं पता कुछ भी नहीं

हाए इस शहर की रौनक़ के मैं सदक़े जाऊँ
ऐसी भरपूर है जैसे कि हुआ कुछ भी नहीं

फिर कोई ताज़ा सुख़न दिल में जगह करता है
जब भी लगता है कि लिखने को बचा कुछ भी नहीं

अब मैं क्या अपनी मोहब्बत का भरम भी न रखूँ
मान लेता हूँ कि उस शख़्स में था कुछ भी नहीं

मैं ने दुनिया से अलग रह के भी देखा 'जव्वाद'
ऐसी मुँह-ज़ोर उदासी की दवा कुछ भी नहीं
Read Full
Jawwad Sheikh
मैं दिल पे जब्र करूँगा तुझे भुला दूँगा
मरूँगा ख़ुद भी तुझे भी कड़ी सज़ा दूँगा

ये तीरगी मिरे घर का ही क्यूँ मुक़द्दर हो
मैं तेरे शहर के सारे दिए बुझा दूँगा

हवा का हाथ बटाऊँगा हर तबाही में
हरे शजर से परिंदे मैं ख़ुद उड़ा दूँगा

वफ़ा करूँगा किसी सोगवार चेहरे से
पुरानी क़ब्र पे कतबा नया सजा दूँगा

इसी ख़याल में गुज़री है शाम-ए-दर्द अक्सर
कि दर्द हद से बढ़ेगा तो मुस्कुरा दूँगा

तू आसमान की सूरत है गर पड़ेगा कभी
ज़मीं हूँ मैं भी मगर तुझ को आसरा दूँगा

बढ़ा रही हैं मिरे दुख निशानियाँ तेरी
मैं तेरे ख़त तिरी तस्वीर तक जला दूँगा

बहुत दिनों से मिरा दिल उदास है 'मोहसिन'
इस आइने को कोई अक्स अब नया दूँगा
Read Full
Mohsin Naqvi
चले थे वो, सो राह-ए-इश्क़ को दुश्वार कहते थे
न हमने इक सुनी उनकी, हमारे यार कहते थे

वो कहते थे हमें तुमसे मोहब्बत है, मोहब्बत है
और ऐसा इक नहीं दसियों, हज़ारों बार कहते थे

हमारे सैकड़ों दुख थे, और उसमें एक दुख ये भी
जो हम से हो के गुज़रे थे, हमें दीवार कहते थे

बड़े शहरों की जानिब कूच करना बेवकूफ़ी है
हमारे गाँव में कुछ लोग थे हुशियार, कहते थे

ख़ुदा ने भी कहानी इस तरह उस साल की लिक्खी
"कहानीकार हमको बख़्श दे" किरदार कहते थे

भले ही प्यार हो या हिज्र हो या फिर सियासत हो
कुछ ऐसे दोस्त थे हर बात पर अ'शआर कहते थे

शिफ़ा मौजूद थी हर मर्ज़ की बस उसकी आँखों में
करिश्मा-साज़ हमको देख ले , बीमार कहते थे
Read Full
Siddharth Saaz
इश्क़ ने जब भी किसी दिल पे हुकूमत की है
तो उसे दर्द की मेराज इनायत की है

अपनी ताईद पे ख़ुद अक़्ल भी हैरान हुई
दिल ने ऐसे मिरे ख़्वाबों की हिमायत की है

शहर-ए-एहसास तिरी याद से रौशन कर के
मैं ने हर घर में तिरे ज़िक्र की जुरअत की है

मुझ को लगता है कि इंसान अधूरा है अभी
तू ने दुनिया में उसे भेज के उजलत की है

शहर के तीरा-तरीं घर से वो ख़ुर्शीद मिला
जिस की तनवीर में तासीर क़यामत की है

सोचता हूँ कि मैं ऐसे में किधर को जाऊँ
तेरा मिलना भी कठिन, याद भी शिद्दत की है

इस तरह औंधे पड़े हैं ये शिकस्ता जज़्बे
जैसे इक वहम ने इन सब की इमामत की है

ये जो बिखरी हुई लाशें हैं वरक़ पर 'जव्वाद'
ये मिरे ज़ब्त से लफ़्ज़ों ने बग़ावत की है
Read Full
Jawwad Sheikh

LOAD MORE

How's your Mood?

Latest Blog