हर एक लफ़्ज़ के तेवर ही और होते हैंतेरे नगर के सुख़न-वर ही और होते हैंतुम्हारी आँखों में वो बात ही नहीं ऐ दोस्तडुबोने वाले समुंदर ही और होते हैं— Abrar Kashif