घर की तक़्सीम में अँगनाई गँवा बैठे हैंफूल गुलशन से शनासाई गँवा बैठे हैंबात आँखों से समझ लेने का दावा मत करहम इसी शौक़ में बीनाई गँवा बैठे हैं— Abrar Kashif