Hug Shayari - Poetic Verses Reflecting Warmth and Affection

Discover a heartwarming collection of Hug Shayari that beautifully captures the emotions of love, comfort, and connection. These poetic lines celebrate the magic of a hug and its power to express unspoken feelings.

Best Hug Shayari on Love and Affection

बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी — Ankita Singh
कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से ये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फ़ासले से मिला करो — Bashir Badr
आज के दिन कभी सीने से लगाते थे तुम्हें और अब तुम को बधाई भी नहीं दे सकते — Astitwa Ankur
इस तरह रोते हैं हम याद तुझे करते हुए जैसे तू होता तो सीने से लगा लेता हमें — Vikram Gaur Vairagi
जो शे'र समझे मुझे दाद वाद देता रहे गले लगाए जिसे ग़म समझ में आ जाए — Balmohan Pandey
हर मुलाक़ात पे सीने से लगाने वाले कितने प्यारे है मुझे छोड़ के जाने वाले — Vipul Kumar
ये कब कहती हूँ तुम मेरे गले का हार हो जाओ वहीं से लौट जाना तुम जहाँ बेज़ार हो जाओ — Parveen Shakir

Heart Touching Hug Shayari in Hindi

हम ने सीने से लगाया दिल न अपना बन सका मुस्कुरा कर तुम ने देखा दिल तुम्हारा हो गया — Jigar Moradabadi
वो अक़्ल-मंद कभी जोश में नहीं आता गले तो लगता है आग़ोश में नहीं आता — Farhat Ehsaas
मिल के होती थी कभी ईद भी दीवाली भी अब ये हालत है कि डर डर के गले मिलते हैं — Unknown
मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी न मिला — Bashir Badr
मैं अपने बाप के सीने से फूल चुनता हूँ सो जब भी साँस थमी बाग़ में टहल आया — Hammad Niyazi
बुरे हालात है पर यार अब भी गले मिलता है, सेहत पूछता है — Gagan Bajad 'Aafat'

Emotional Hug Shayari on Comfort and Care

तुम्हें ज़रूरत क्या कोई त्योहारों की रंग लगाकर गले लगाने आ जाओ — Divy Kamaldhwaj
चाहो मुझे तो रोक लो लग जाओ सीने से मैं जा रहा हूँ आँख से ओझल नहीं हुआ — Praveen Bhardwaj
न जाने क्यूँँ गले से लगने की हिम्मत नहीं होती न जाने क्यूँँ पिता के सामने बेटे नहीं खुलते — Kushal Dauneria
हम ने सलाम अर्ज़ कहा अपने यार से वो राम-राम कहके गले से लिपट गया — Dharamraj deshraj
गले मिली कभी उर्दू जहाँ पे हिन्दी से मिरे मिज़ाज में उस अंजुमन की ख़ुशबू है — Satish Shukla Raqeeb
पेड़ को काटने वाले क्या जाने दुख हम गले लग नहीं सकते दीवार से — Neeraj Neer
शक है तुझे अगर ये अब भी गुदाज़ है दिल तो सीने से कभी ये पत्थर निकाल मेरा — Abhay Aadiv
गले सब मिल रहे हैं उस सेे हँसकर हमारा हक़ तो मारा जा रहा है — Pooja Bhatia

Beautiful Hug Shayari in Urdu

मना भी लूँगा गले भी लगाऊँगा मैं 'अली' अभी तो देख रहा हूँ उसे ख़फ़ा कर के — Ali Zaryoun
वो गले से लिपट के सोते हैं आज-कल गर्मियाँ हैं जाड़ों में — Muztar Khairabadi
गले में उस के ख़ुदा की अजीब बरकत है वो बोलता है तो इक रौशनी सी होती है — Bashir Badr
इस तरह रोते हैं हम याद तुझे करते हुए जैसे तू होता तो सीने से लगा लेता हमें — Vikram Gaur Vairagi
चारागरी दिखा तू हमें अपने लम्स की हम को गले लगा के हमारा इलाज कर — Siddharth Saaz
जैसे कोई रोता है गले प्यार से लग कर कल रात मैं रोया तेरी दीवार से लग कर — Aziz Ejaaz

Short Hug Shayari for Instagram Captions

ये भी इक तरकीब है दुश्मन से लड़ने की गले लगा लो जिस पर वार नहीं कर सकते — Shariq Kaifi
यूँँ हर किसी से भी कोई मिलता है क्या गले उकता गए हैं अब तिरी आवारगी से हम — Amaan Pathan
बदन उतार के खूँटी पे टाँग आया हूँ तुम्हारा फ़र्ज़ है मुझ को गले लगाने का — Harsh saxena
मैं रो पड़ूँगा बहुत भींच के गले न लगा मैं पहले जैसा नहीं हूँ किसी का दुख है मुझे — Qamar Abbas Qamar
लगाओ गले से फिर उन दोस्तों को वही ईद फिर से मनाओ कभी तुम — Amaan Pathan
मैं ने ऐ दिल तुझे सीने से लगाया हुआ है और तू है कि मिरी जान को आया हुआ है — Ajmal Siraj
ख़ुदा की उस के गले में अजीब क़ुदरत है वो बोलता है तो इक रौशनी सी होती है — Bashir Badr

Poetic Hug Shayari on Warmth and Closeness

वो ख़ार ख़ार है शाख़-ए-गुलाब की मानिंद मैं ज़ख़्म ज़ख़्म हूँ फिर भी गले लगाऊँ उसे — Ahmad Faraz
तुम्हारे क़दमों की आहट से ये दिल उछल पड़ता है क्या हश्र होगा जाना जब तुम आ कर गले लगाओगी — Yashvardhan Jain
तुम्हें वो ख़ुश रखे बस, ये दुआ है गले में धागा जिस का बाँध ली हो — Aarush Sarkaar
अभी तक याद है वो दिन कि जब महबूब रोए थे लिपट कर के गले से उन के हम भी खूब रोए थे — Akash Rajpoot
साँसों के बिन वजूद कहाँ धड़कनों का है माँ से कहो गले से लगाए न लौट कर — Vedic Dwivedi
देखते हैं तो लहू जैसे रगें तोड़ता है हम तो मर जाएँगे सीने से लगा कर उस को — Irfan Siddiqi
पहले पहले तो थी रोने की सहूलत क्या क्या आँख भरती वो तो सीने से लगा लेता था — Moin Hasan
दे डाला हम ने सीने से दिल को निकाल कर रखता नहीं वो शख़्स उसे भी सँभाल कर — Tausif Alam
ये ख़ुशी भी छीन ली इस कमबख़त कोरोना ने देखते ही दौड़कर उन के गले लग जाते थे — Shayra kirti
दिल जला कर फिर करेंगे इश्क़ रौशन दिल-जलों लग कर गले रोना है पहले — Vedic Dwivedi

Hug Shayari on Love and Togetherness

पास आता है गले लेकिन लगाता ही नहीं है इक सितमगर है कि मुझ पे हक जताता ही नहीं है — ATUL SINGH
ख़ुशी ढूँढ़ने जब चलूँगा मैं तुझ से गले आ लगूँगा — Kohar
अपने सीने से लगाकर जो तेरा ग़म रक्खा दिल की मिट्टी को हमेशा ही मुलायम रक्खा — Nirmal Nadeem
जिस्म से आती है मेरे जो ग़रीबी की महक इस लिए ईद को सीने से लगाया न गया — ''Akbar Rizvi"
फिर हुए आज मजबूर मस्खे गुलू के लिए हम फिर किसी चहरे ने आज रस्सी गले से निकाली — Raza sahil
तुझे शीशा बनाया है ख़ुदा ने ध्यान रक्खा कर गले पत्थर के जो लगने लगेगा टूट जाएगा — Shubham Seth
उस को भूलने का ये ही तरीक़ा है बस मेरे सीने से दिल को निकाला जाए — gulab muntazir
हो गर बराबरी में आना तो बढ़ा कद तू ये लोग, छोटा हो कद तो गले नहीं लगते — Vivek Chaturvedi
सीने से लग गए हैं वो चुप-चाप आनकर शायद अब उन को हम सेे शिकायत नहीं रही — Shajar Abbas

Thoughtful Hug Shayari on Friendship and Bonds

मुझ को दिल से निकालने के लिए उस ने सीने से दिल निकाल दिया — Shajar Abbas
बिछड़ते हुए मेरे सीने से लग कर वो रो कर के बोली मुझे याद रखना — Gaurav Singh
सीने से लगा लो मुझे तुम इक दफ़ा आ कर स्वेटर से मेरी जान ये सर्दी नहीं रुकती — Dipendra Singh 'Raaz'
तुम अपना दीन दिखाओ उसे, मोहब्बत भी गले लगाओ मगर पहले तुम सलाम करो — Mohammad Aquib Khan
सीने से मांँ लगाए ही रखती है रात भर रोता हुआ जो नींद से उठ जाऊँ मैं कभी — Dipendra Singh 'Raaz'
मेरा ग़म मेरे दिल से बाहर निकल कर गले से लगाकर मुझे रो पड़ेगा — Gaurav Singh
मुझ को वो आन के सीने से लगा लेती थी मैं 'शजर' जब भी परेशान हुआ करता था — Shajar Abbas
दिल गुलिस्तान में ख़ारों का जला रक्खा है फूल ने फूल को सीने से लगा रक्खा है — Shajar Abbas

Romantic Hug Shayari for Lovers

गले से लग कर तुम्हीं ज़माने पे राज़ खोलो तुम्हारा होने की किस को किस को सफ़ाई देंगे — shahnawaaz khan
मैं मौत से ऐसे गले लगने को हूँ 'साहिर' तुम देख लेना रो पड़ेगी ख़ुद-कुशी मुझ को — Saahir
मुझे जब भी लगाती वो गले से मिरा ये दिल धड़कता तब बहुत है — Kaviraj " Madhukar"
हम गले मिलने ही वाले थे मगर आ गया मज़हब हमारे बीच में — Umesh Maurya
गले से वो लगा ले जिस को भी अपने उसे फिर इत्र की दरकार ही क्या है — Harsh saxena
वो जो तुम से गले लगते होंगे रातरानी सा महकते होंगे — Rachit Sonkar
ज़माने वालों का हरगिज़ न आज ख़ौफ़ करो मता-ए-जान चलो आओ तुम गले से लगो — Shajar Abbas
सुन पाओगे इस दिल की हर धड़कन को तुम लग कर तो देखो सीने से मेरे — Kanha Mohit
एक तमन्ना मेरी बस इतनी सी है ख़्वाबों में आ जाओ गले लग जाओ तुम — Sanskar Shrivastav

Hug Shayari on Healing and Connection

मैं तेरी तस्वीर लगाकर सीने से अक्सर बैंड सनम के गाने सुनता हूँ — Sanskar Shrivastav
ये सर्द मौसम ये घनघोर कोहरा आओ ज़रा तुम गले से लगा लो — Vishal sharma
ख़ुशी से तुम लगा लेना गले उस को अगर मिल जाए हम जैसा ज़माने में — Sandeep dabral 'sendy'
साँस मुझ को अब तलक़ आई नहीं है तू गले लग कर मुझे साँसें अता कर — Abhay Mishra
हम गले लगा कर के तुम को माफ़ कर देंगे लौट कर चले आओ इस महीने होली है — Gaurav Singh
कसकर गले लगाना उसे चाहता था मैं बस चाहने से मेरे ही क्या ख़ाक होता है — Aqib khan
मुझे इतना हक़ दो मुहब्बत की जानिब तुम्हें चूम लूँ या गले से लगा लूँ — Umesh Maurya