Hammad Niyazi

Hammad Niyazi

@hammad-niyazi

Hammad Niyazi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Hammad Niyazi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

3

Content

5

Likes

99

Shayari
Audios
  • Sher
  • Ghazal

Sher

आख़िरी बार मैं कब उस से मिला याद नहीं बस यही याद है इक शाम बहुत भारी थी — Hammad Niyazi
सुब्ह सवेरे नंगे पाँव घास पे चलना ऐसा है जैसे बाप का पहला बोसा क़ुर्बत जैसे माँओं की — Hammad Niyazi
मैं अपने बाप के सीने से फूल चुनता हूँ सो जब भी साँस थमी बाग़ में टहल आया — Hammad Niyazi
वो पेड़ जिस की छाँव में कटी थी उम्र गाँव में मैं चूम चूम थक गया मगर ये दिल भरा नहीं — Hammad Niyazi

Ghazal

दिल के सूने सहन में गूँजी आहट किस के पाँव की धूप-भरे सन्नाटे में आवाज़ सुनी है छाँव की इक मंज़र में सारे मंज़र पस-मंज़र हो जाने हैं इक दरिया में मिल जानी हैं लहरें सब दरियाओं की दश्त-नवर्दी और हिजरत से अपना गहरा रिश्ता है अपनी मिट्टी में शामिल है मिट्टी कुछ सहराओं की बारिश की बूँदों से बन में तन में एक बहार आई घर घर गाए गीत गगन ने गूँजीं गलियाँ गाँव की सुब्ह सवेरे नंगे पाँव घास पे चलना ऐसा है जैसे बाप का पहला बोसा क़ुर्बत जैसे माँओं की इक जैसा एहसास लहू में जीता जागता रहता है एक उदासी दे जाती है दस्तक रोज़ हवाओं की सीनों और ज़मीनों का अब मंज़र-नामा बदलेगा हर सू कसरत हो जानी है फूलों और दु'आओं की — Hammad Niyazi